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पुराने नोट बदलवाने के लिए भाई-बहन ने मोदी को लिखा खत, मिला ये जवाब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 17 Jun 2017 03:39 PM IST
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पीएमओ का पत्र और दोनों बच्चे
- फोटो : amar ujala
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कोटा के मंडाना इलाके में निराश्रित गृह में रहने वाले सूरज और सलोनी की प्रधानमंत्री कार्यालय ने आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। नोटबंदी के बाद गत 24 मार्च को इन बच्चों के बंद पड़े घर से बाल कल्याण समिति को 96 हजार के पुराने नोट मिले थे। पीएमओ ने प्रधानमंत्री कोष से निराश्रित भाई-बहनों को 50 हजार रुपए, सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा के तहत पांच वर्षों के लिये बीमा प्रीमियम की मंजूरी दी है।
मामला नोटबंदी के बाद मार्च महिने का है। माता—पिता की मौत के बाद से ही नाबालिग भाई—बहन सूरज और सलोनी कोटा में एक निराश्रित गृह में रह रहे हैं। इसी दौरान नोटबंदी के बाद बाल कल्याण समिति की ओर से इनके मंडाना में बंद पड़े घर की तलाशी लेने की गुजारिश की गई थी। इसके बाद पुलिस ने 2013 से बंद पड़े इनके घर की तलाशी ली तो 500 और 1000 के पुराने नोटों की कुल 96,000 की रकम पुलिस को बरामद हुई। यह रकम बाल कल्याण समिति द्वारा आरबीआई कोटा में बच्चों के नाम एफडी कराने ले जाई गई तो वहां से मना कर दिया गया था।
मामले में पीएमओ तक बात पहुंची तो वहां से एक पत्र भेजा गया है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष हरिश गुरुबख्शाणी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से 6 जून को भेजा गया पत्र उन्हें मिल गया है। इसमें आर्थिक सहायता के साथ बीमा पॉलिसी के लिए भी लिखा गया है। सलोनी और सूरज के पिता की साल 2007 में मौत हो गई थी और साल 2013 में मां की हत्या कर दी गयी थी। तभी से ये दोनों राजकीय निराश्रित गृह में दिन काट रहे हैं।
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मामला नोटबंदी के बाद मार्च महिने का है। माता—पिता की मौत के बाद से ही नाबालिग भाई—बहन सूरज और सलोनी कोटा में एक निराश्रित गृह में रह रहे हैं। इसी दौरान नोटबंदी के बाद बाल कल्याण समिति की ओर से इनके मंडाना में बंद पड़े घर की तलाशी लेने की गुजारिश की गई थी। इसके बाद पुलिस ने 2013 से बंद पड़े इनके घर की तलाशी ली तो 500 और 1000 के पुराने नोटों की कुल 96,000 की रकम पुलिस को बरामद हुई। यह रकम बाल कल्याण समिति द्वारा आरबीआई कोटा में बच्चों के नाम एफडी कराने ले जाई गई तो वहां से मना कर दिया गया था।
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मामले में पीएमओ तक बात पहुंची तो वहां से एक पत्र भेजा गया है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष हरिश गुरुबख्शाणी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से 6 जून को भेजा गया पत्र उन्हें मिल गया है। इसमें आर्थिक सहायता के साथ बीमा पॉलिसी के लिए भी लिखा गया है। सलोनी और सूरज के पिता की साल 2007 में मौत हो गई थी और साल 2013 में मां की हत्या कर दी गयी थी। तभी से ये दोनों राजकीय निराश्रित गृह में दिन काट रहे हैं।
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