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Rajasthan: 6500 पशु चिकित्सालयों में लटका ताला, 10 हजार पशु चिकित्सक सामूहिक छुट्टी पर

Tue, 30 Aug 2022 11:50 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 30 Aug 2022 11:50 AM IST
सार

राजस्थान में लंपी वायरस थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को प्रदेश के दस हजार से अधिक पशु चिकित्सा कर्मी सामूहिक अवकाश पर हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।

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Ten thousand veterinary doctors on collective leave in Rajasthan 6500 veterinary hospitals closed
पशु चिकित्सालय पर लटका ताला - फोटो : Social Media

विस्तार

राजस्थान में लंपी वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। इससे आहत होकर प्रदेश के सभी पशु चिकित्सक सामूहिक रुप से छुट्टी पर चले गए हैं। चिकित्सकों के छुट्टी पर जाने से पशुपालकों में चिंता नजर आ रही है। 10 हजार पशु चिकित्सकों के छुट्टी पर जाने के बाद प्रमुख सचिव पीसी कृष्ण भी अवकाश पर चले गए। फिलहाल, उन्होंने पशु चिकित्सकों से अपील की कि वे काम पर वापस लौटे।

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बताते चलें, प्रदेश में फिलहाल पशु चिकित्सा अधिकारियों के 70 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐसे में सामूहिक अवकाश के कारण से 6500 पशु चिकित्सा संस्थाओं पर ताले लटके हुए हैं। पुशपालकों का आरोप है, सरकार उनके साथ पूर्व में किया गया लिखित समझौता भी लागू नहीं कर रही है। पशु चिकित्सा कर्मियों ने 20 अगस्त से सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला किया था, जिसके बाद पशुपालन मंत्री और विभाग के शासन सचिव ने इनसे मांग पत्र पर काम करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा था।
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इस बातचीत के दौरान आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगों के निस्तारण का भी भरोसा दिया गया था, जिसमें उन्हें 11 सूत्रीय मांग पत्र पर आश्वासन दिया गया था। बाद में सभी 11 मांगों पर तीन महीने में प्रशासनिक आदेश जारी करने पर लिखित सहमति बनी थी।
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लंपी स्किन वायरस जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में गोवंश हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक सात लाख से अधिक गोवंश लंपी स्किन रोग से संक्रमित हैं। वहीं 35 हजार से ज्यादा बेजुबान पशुओं की अब तक मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सा केंद्रों पर तालाबंदी के बाद लंपी की रोकथाम अभियान पर खासा असर देखा जा रहा है। लंपी डिजीज ने 36 हजार 826 गायों की जिंदगी ले ली है। वहीं, दूसरी ओर आज से इस बीमारी से जूझ रहे प्रशासन के सामने पशु चिकित्सक संघ के कार्य बहिष्कार जैसी बड़ी चुनौती भी आ खड़ी हुई है।

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