{"_id":"5a41fc3a4f1c1bcf6d8b63e6","slug":"temple-for-kids-to-be-made-in-in-tribal-area-where-kids-will-know-their-rights","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यहां बच्चों के लिए बनेगा अनूठा मंदिर, जहां प्रसाद में मिलेगा बाल साहित्य ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां बच्चों के लिए बनेगा अनूठा मंदिर, जहां प्रसाद में मिलेगा बाल साहित्य
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 26 Dec 2017 01:59 PM IST
विज्ञापन
डेमो इमेज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्चों के लिए एक ऐसा अनूठा मंदिर बनने जा रहा है जहां वो आध्यात्म से जुड़ने के साथ अपने अधिकारों को जान सकेंगे। ये मंदिर राजस्थान के आदिवासी बाहुल इलाके बांसवाड़ा में बनने जा रहा है। इस मंदिर में खास बात ये होगी की यहां भगवान की मूर्तियां भी उनके बालपन की लगाई जाएगी जिनमें बाल हनुमान, लड्डू गोपाल, बाल गणेश,बाल कार्तिकेय शामिल हैं।
राज्य बाल विकास आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण कराने के पीछे बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और बाल अपराधों के खिलाफ लोगों को जागरुक करना है। यहां प्रसाद के रुप में बाल पुस्तिका मिलेगी। जिनमें बाल अधिकार और उनके संरक्षण सबंधी कानूनों की जानकारी होगी। चतुर्वेदी ने बताया कि मंदिर की दीवारों पर बाल चालीसा लिखवाई जाएगी, जिसमें उनके अधिकारों के संबध में बातें लिखी होंगी।
विज्ञापन
राज्य बाल विकास आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण कराने के पीछे बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और बाल अपराधों के खिलाफ लोगों को जागरुक करना है। यहां प्रसाद के रुप में बाल पुस्तिका मिलेगी। जिनमें बाल अधिकार और उनके संरक्षण सबंधी कानूनों की जानकारी होगी। चतुर्वेदी ने बताया कि मंदिर की दीवारों पर बाल चालीसा लिखवाई जाएगी, जिसमें उनके अधिकारों के संबध में बातें लिखी होंगी।
विज्ञापन
आदिवासी बच्चों के लगेंगे स्टेच्यू
बता दें कि ये मंदिर बांसवाड़ा इलाके के आदिवासी कस्बे घाटोल में बनाया जाना प्रस्तावित है। बांसवाड़ा डूंगरपुर से सांसद मणिशंकर निमामा ने कहा कि इस खास मंदिर में जिन आदिवासी बच्चों के नाम कोई उपलब्धि है उनके मंदिर प्रांगण में स्टेच्यू लगाए जाएंगे।
यहां पर कुपोषण दूर करने के लिए हवन और पूजा कराई जाएगी। समय समय पर कार्यक्रमों को आयोजित कराकर विशेषतौर पर आदिवासी बच्चों के माता पिता से उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने का आग्रह भी किया जाएगा। यहां एक बाल सेना का भी गठन किया जाएगा जो कि घर घर जाकर कुपोषण के खिलाफ लोगों को जागरुक करेगी।
यहां पर कुपोषण दूर करने के लिए हवन और पूजा कराई जाएगी। समय समय पर कार्यक्रमों को आयोजित कराकर विशेषतौर पर आदिवासी बच्चों के माता पिता से उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने का आग्रह भी किया जाएगा। यहां एक बाल सेना का भी गठन किया जाएगा जो कि घर घर जाकर कुपोषण के खिलाफ लोगों को जागरुक करेगी।