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अनोखी गणगौर, तीन सौ साल से नहीं किया कोई मेकअप!

Fri, 24 Mar 2017 02:39 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Fri, 24 Mar 2017 02:39 PM IST
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Sikar's Gangaur is special in itself
सीकर में ईसर गणगौर - फोटो : अमर उजाला
यहां की गणगौर की सादगी सवा तीन सौ साल से जस की तस है। न कोई बनावटीपन न कोई रंग-रोगन। बिल्कुल उसी रूप में जिस रूप में इन्हें मेवाड़ से लाया गया था।
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हम बात कर रहे हैं सीकर की गणगौर की। जयपुर की तरह ही सीकर की गणगौर भी काफी प्रसिद्ध है। यहां ईसर गणगौर का जोड़ा अपने आप में बेहद अनोखा है। जब से इन्हें तैयार किया गया है तब से अब तक किसी तरह का रंग रोगन नहीं किया गया। इनकी पुरानी रंगत बनी रहे इसके लिए इन्हें एक खास तरह के कपड़े में लपेट कर रखा जाता है।

जब भी इन प्रतिमाओं को निकाला जाता है तो उससे पहले इन प्रतिमाओं को खास स्नान करवाया जाता है। प्रतिमाओं की चमक  बनी रहे इसके लिए एक खास तरह के इत्र से इन्हें स्नान करवाकर सफाई की जाती है। इससे चेहरे के रंग रूप को नुकसान नहीं होता और चमक भी बरकरार रहती है।
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गणगौर की सवारी निकाले जाने वाली सांस्कृतिक मंडल से जुड़े लोगों की मानें तो यह सब एक मान्यता के तहत किया जाता है। माना जाता है कि हरे रंग के कपड़े में लपेटे जाने से ईसर गणगौर का रंग रूप नहीं बिगड़ता। हां यह जरूर है कि करीब बीस साल  बाद उनकी पोशाक बदली गई है।
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मेवाड़ से लाई गई प्रतिमा

Sikar's Gangaur is special in itself
यूं हरे कपड़े में लपेटकर रखा जाता है - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक सीकर में गणगौर मेले की शरुआत सीकर ठीकाने के तत्कालीन राजा राव राजा कल्याण सिंह के समय की गई थी। ईसर एवं गणगौर की प्रतिमा को मेवाड़ से लाया गया। इसके बाद 1967 से राजघराने ने गणगौर मेले का दायित्व सांस्कृतिक मंडल को दिया गया।

गौरतलब है कि गणगौर का पारंपरिक पर्व 30 मार्च को मनाया जाएगा। ये सवारी शाम पांच बजे रघुनाथजी मंदिर से शुरू होकर सुभाष चौक यहां से घूमकर बावड़ी गेट,जाटिया बाजार,सूरजपोल गेट,घंटाघर,महामंदिर होती हुई रामलीला मैदान पहुंचेगी। गणगौर मेले की बोलावणी भी इसी दिन रात्रि में की जाएगी। बोलावणी का कार्यक्रम रामलीला मैदान से सवारी वापिस आते समय कल्याण जी मंदिर के सामने स्थित तोदियों के कुएं पर किया जाएगा।
 
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