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शादी की सालगिरह पर पति का अजीब फरमान, पत्नी को छोड़ मूर्ति संग बिताऊंगा जीवन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 12 Dec 2017 08:12 PM IST
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मूर्ति और राजाराम कर्मयोगी
- फोटो : अमर उजाला
शादी की पांचवीं सालगिरह पर पति ने ऐसा फैसला ले लिया कि पत्नी दंग रह गई और समाज वाले चौंक गए। पति ने पत्नी को छोड़ बाकी जीवन एक मूर्ति के साथ बिताने का निर्णय ले लिया है।
इस तरह का अजीबो गरीब मामला कोटा का है। कोटा में एक सामजिक कार्यकर्ता ने अपने दाम्पत्य जीवन से किनारा करते हुए एक आदमकद की मूर्ति को भविष्य के लिए पत्नी रूप में स्वीकार किया है। राजाराम कर्मयोगी नामक के इस व्यक्ति ने जो कारण बताया वो भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है। उसका कहना है कि दाम्पत्य जीवन समाजसेवा में व्यवधान उत्पन्न कर रहा है।
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इस तरह का अजीबो गरीब मामला कोटा का है। कोटा में एक सामजिक कार्यकर्ता ने अपने दाम्पत्य जीवन से किनारा करते हुए एक आदमकद की मूर्ति को भविष्य के लिए पत्नी रूप में स्वीकार किया है। राजाराम कर्मयोगी नामक के इस व्यक्ति ने जो कारण बताया वो भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है। उसका कहना है कि दाम्पत्य जीवन समाजसेवा में व्यवधान उत्पन्न कर रहा है।
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साधुओं की मौजूदगी बनाया जीवन साथी
मूर्ति केसाथ व्यक्ति
- फोटो : अमर उजाला
राजाराम ने इस फैसले के बाद एक आदमकद की मूर्ति को न सिर्फ एक नाम दिया बल्कि उसे पत्नी के रूप में स्वीकार किया है। इतना ही नहीं उसने कुछ साधुओं की मौजूदगी में मूर्ति को पार्वती नाम दिया और उसे जीवन साथी बना लिया।
दूसरी तरफ पत्नी अपने पति के इस फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर रही है। पत्नी अल्का दुलारी का इस फैसले पर कहना है कि वो अपने पति को परमेश्वर मानती है और भविष्य की जिदंगी भी अपने पति के साथ ही बिताना चाहती है। आपको बता दे कि राजाराम कर्मयोगी ने 12 ,12 के संयोग से साल 2012 में 12 तारिख को ठीक 12 बजे विवाह किया था।
दूसरी तरफ पत्नी अपने पति के इस फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर रही है। पत्नी अल्का दुलारी का इस फैसले पर कहना है कि वो अपने पति को परमेश्वर मानती है और भविष्य की जिदंगी भी अपने पति के साथ ही बिताना चाहती है। आपको बता दे कि राजाराम कर्मयोगी ने 12 ,12 के संयोग से साल 2012 में 12 तारिख को ठीक 12 बजे विवाह किया था।