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32 हजार मासूमों की आंख खुलने से पहले ही हो गईं बंद, जानकारी ने उड़ाए होश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 30 Nov 2017 02:18 PM IST
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child death
पिछले कुछ माह में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राजस्थान व अन्य कई राज्यों से नवजात की मौतों की खबरें आती रही हैं। लेकिन हाईकोर्ट में एक ऐसी जानकारी सरकार की ओर से दी गई है, जिसने सभी के होश फाख्ता कर दिए हैं।
दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायधीश गोविन्द माथुर ने एक पीएआईएल की सुनवाई करते हुए बीते छह माह में राजस्थान में नवजात बच्चों की मौत की रिपोर्ट मांगी थी। इसके जवाब में सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि बीते एक वर्ष में राजस्थान में 32 हजार से अधिक नवजात की मौत हुई है।
सरकार के इन आंकड़ों ने राजस्थान में चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है। वहीं जानकारी के अनुसार अधिकतर बच्चों की मौत कुपोषण के कारण हुई है।
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दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायधीश गोविन्द माथुर ने एक पीएआईएल की सुनवाई करते हुए बीते छह माह में राजस्थान में नवजात बच्चों की मौत की रिपोर्ट मांगी थी। इसके जवाब में सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि बीते एक वर्ष में राजस्थान में 32 हजार से अधिक नवजात की मौत हुई है।
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सरकार के इन आंकड़ों ने राजस्थान में चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है। वहीं जानकारी के अनुसार अधिकतर बच्चों की मौत कुपोषण के कारण हुई है।
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मौतों का कारण सरकारी व्यवस्था
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साथ ही अस्पताल में चिकित्साकर्मियों की कमी भी बच्चों की लगातार मौत का कारण बन रही है। दरअसल मामला तब संज्ञान में आया था जब बांसावाड़ा में दो माह में 90 नवजात बच्चों की बात सामने आई थी।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए मामले की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए थे। इस मामले की रिपोर्ट में कहा गया कि बांसवाड़ा में खस्ताहाल चिकित्सा व्यवस्था नवजातों की मौत का कारण थी। इसके बाद ही कोर्ट ने प्रदेशभर में नवजात की मौत का आंकड़ा पेश करने के लिए सरकार को आदेश दिए थे।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए मामले की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए थे। इस मामले की रिपोर्ट में कहा गया कि बांसवाड़ा में खस्ताहाल चिकित्सा व्यवस्था नवजातों की मौत का कारण थी। इसके बाद ही कोर्ट ने प्रदेशभर में नवजात की मौत का आंकड़ा पेश करने के लिए सरकार को आदेश दिए थे।