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राजस्थान हाईकोर्ट ने टेंडर आवंटन पर लगाई रोक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 04 Sep 2017 08:05 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली के बिलों के लिए फिर से स्पॉट बिलिंग की व्यवस्था करने के मामले में टेंडर प्रक्रिया जारी रखने की छूट देते हुए टेंडर आवंटन पर रोक लगा दी है।
न्यायाधीश के.एस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश तरुण टांक की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि बिजली कंपनी पहले बिल जारी करने के लिए स्पॉट बिलिंग की व्यवस्था अपनाती थी, लेकिन कुछ महिनों बाद ही 2011 में इसे समाप्त कर फोटो बिलिंग की व्यवस्था कर दी। इसके चलते बिजली कर्मचारी मीटर की फोटो लेकर कंपनी में भेजता था और वहां संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर होकर बिल उपभोक्ता को जारी किया जाता था।
यह योजना स्पॉट बिलिंग के मुकाबले 18 रुपए प्रति बिल सस्ती भी पड़ती थी। इसके बावजूद कंपनी की ओर से अब पुन: स्पॉट बिलिंग योजना शुरू की जा रही है। जिससे बिल की गणना करने में पारदर्शिता नहीं रहेगी और फोटो बिलिंग योजना के मुकाबले स्पॉट बिलिंग की व्यवस्था महंगी भी रहेगी। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने टेंडर आवंटन करने पर रोक लगाते हुए प्रक्रिया जारी रखने को कहा है।
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न्यायाधीश के.एस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश तरुण टांक की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि बिजली कंपनी पहले बिल जारी करने के लिए स्पॉट बिलिंग की व्यवस्था अपनाती थी, लेकिन कुछ महिनों बाद ही 2011 में इसे समाप्त कर फोटो बिलिंग की व्यवस्था कर दी। इसके चलते बिजली कर्मचारी मीटर की फोटो लेकर कंपनी में भेजता था और वहां संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर होकर बिल उपभोक्ता को जारी किया जाता था।
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यह योजना स्पॉट बिलिंग के मुकाबले 18 रुपए प्रति बिल सस्ती भी पड़ती थी। इसके बावजूद कंपनी की ओर से अब पुन: स्पॉट बिलिंग योजना शुरू की जा रही है। जिससे बिल की गणना करने में पारदर्शिता नहीं रहेगी और फोटो बिलिंग योजना के मुकाबले स्पॉट बिलिंग की व्यवस्था महंगी भी रहेगी। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने टेंडर आवंटन करने पर रोक लगाते हुए प्रक्रिया जारी रखने को कहा है।
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