{"_id":"59f730d34f1c1bd9798b9172","slug":"rajasthan-highcourt-orders-videography-of-illegal-buses-to-be-present-infront-of-court","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का आदेश, अवैध बसों की वीडियोग्राफी कोर्ट में करनी होगी पेश ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का आदेश, अवैध बसों की वीडियोग्राफी कोर्ट में करनी होगी पेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 30 Oct 2017 07:46 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में अवैध बसों के संचालन के मामले में परिवहन आयुक्त को कड़ी फटकार लगाई है। इसके साथ ही अदालत ने बस अड्डों के आसपास से अवैध चल रही बसों और लोक परिवहन बसों के लिए बनाए स्टैंड की वीडियोग्राफी कर 16 नवंबर को अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश निहालसिंह व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने परिवहन आयुक्त को पेश होने के आदेश दिए। जिसकी पालना में परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल, जयपुर आरटीओ कल्पना अग्रवाल और सीकर आरटीओ भजनलाल सहित सतवीर यादव अदालत में पेश हुए।
विज्ञापन
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश निहालसिंह व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने परिवहन आयुक्त को पेश होने के आदेश दिए। जिसकी पालना में परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल, जयपुर आरटीओ कल्पना अग्रवाल और सीकर आरटीओ भजनलाल सहित सतवीर यादव अदालत में पेश हुए।
विज्ञापन
क्यों ना परिवहन विभाग के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए: कोर्ट
डेमो इमेज
- फोटो : Internet
आज अदालत ने परिवहन आयुक्त को कहा कि वे अवैध बसें संचालित होने वाले स्थानों पर कैमरे लगाए। इस पर परिवहन आयुक्त ने कहा कि परिवहन विभाग यह काम करने में असमर्थ है। जयपुर और जोधपुर में जेडीए के अधीन ट्रैफिक कंट्रोल कमेटी बनी हुई है।
इस पर अदालत ने कहा कि अदालती आदेश के बावजूद विभाग अवैध बसों का संचालन रोकने में असफल रहा है। ऐसे में क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। इस पर परिवहन आयुक्त ने वीडियोग्राफी कराने पर अपनी सहमति दी।
इस पर अदालत ने कहा कि अदालती आदेश के बावजूद विभाग अवैध बसों का संचालन रोकने में असफल रहा है। ऐसे में क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। इस पर परिवहन आयुक्त ने वीडियोग्राफी कराने पर अपनी सहमति दी।