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पेंशन बंद करने का आदेश मनमाना, ब्याज सहित करें भुगतान: हाईकोर्ट

Wed, 01 Nov 2017 07:49 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 01 Nov 2017 07:49 PM IST
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rajasthan highcourt ordered to give rate of interest in pension case
डेमो इमेज - फोटो : Internet
राजस्थान हाईकोर्ट ने पीएफ विभाग की ओर से अनुदानित संस्था से सेवानिवृत्त शिक्षिका की पेंशन बंद करने को मनमाना बताया है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग को आदेश दिए हैं कि वह पेंशन का भुगतान ब्याज सहित करें। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश विजय बेजल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
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याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता सरकार से अनुदानित गीता बजाज बाल मंदिर से सेवानिवृत्त हुई थी। याचिकाकर्ता को पीएफ पेंशन स्कीम, 1995 के तहत पेंशन मिल रही थी। वहीं 19 अप्रैल 2007 को विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए आदेश जारी किया कि अनुदानित संस्थाओं पर पेंशन स्कीम नियम लागू नहीं होते हैं।  ऐसे में याचिकाकर्ता की पेंशन बंद की जाती है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता का अंशदान भी कोषागार में जमा करा दिया गया। 
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विभाग के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश उन्हें मामलों में लागू होगा, जहां संस्था ने शुल्क जमा करवाकर पीएफ आयुक्त से प्रावधानों में छूट की प्रार्थना की है। जबकि स्कूल की ओर से ऐसा कोई प्रार्थना पत्र पेश नहीं किया गया। इसके अलावा विभाग ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना ही आदेश जारी कर दिया। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को ब्याज सहित रोकी गई पेंशन जारी करने के आदेश दिए हैं।
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