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Rajasthan: गजब कर गए CM गहलोत! फ्री बिजली की घोषणा तो कर दी, लेकिन कंपनियों की स्थिति नाजुक

Sat, 11 Feb 2023 11:01 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 11 Feb 2023 11:01 AM IST
सार

भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने भारत के 20वीं विद्युत शक्ति सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी कर समस्त राज्यों में बिजली की उपलब्धता, मांग और घाटे की स्थिति के बारे में बताया। रिपोर्ट में साल 2022-23 से लेकर 2031-32 तक का पूर्वानुमान जारी कर आने वाले समय में मांग बढ़ने के साथ-साथ सप्लाई एवं मांग में अंतर को दर्शाया। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
 

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Rajasthan Free electricity was announced in Rajasthan but the condition of the companies is critical
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वर्तमान समय में राजस्थान में पहली बार किसानों और आम उपभोक्ता को सर्दियों में चार घंटे तक की घोषित कटौती तक का सामना करना पड़ा, जिसका सीधा असर रबी की फसल पर विपरीत पड़ा। साथ ही उद्योगों पर बिजली कटौती की गई, अब केंद्र सरकार द्वारा जारी 20वीं विद्युत शक्ति सर्वेक्षण रिपोर्ट से राज्य सरकार की नींद उड़ गई है। क्योंकि कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन कम हुआ है। वहीं मेंटेनेंस के चलते भी उत्पादन की कई इकाइयां बंद पड़ी हैं, जिस कारण ज्यादा मांग और किसानों को बिजली देने की नीयत से 12 रुपये दर से महंगी दर पर बिजली खरीद की जा रही है, फिर भी चार घंटे तक की कटौती की नौबत आन पड़ी।

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बता दें कि इसका असर न केवल उपभोक्ता पर पड़ा, बल्कि कर्मचारी और अधिकारी भी इससे अछूते नहीं रहे। गत छह महीने से महंगी दर पर बिजली खरीद और वित्तीय प्रबंधन सही तरह न करने के कारण वेतन तक समय पर जारी नहीं किया गया, जिस कारण कर्मचारियों को आंदोलन तक करने पड़ गए। महंगी दर पर बिजली एक्सचेंज से खरीदने के कारण डिस्कॉम को नकद पैसे देने पड़ रहे हैं, वो भी तीन गुना अधिक दर पर, जिससे वेतन देने के लिए समय पर पैसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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दूसरी ओर कोयला समय पर उपलब्ध न होने और केंद्र एवं राज्य सरकार में समन्वय की कमी के कारण सरकारी बिजली निगमों को उचित गुणवत्ता का कोयला न मिलने से भी कई इकाइयां बंद पड़ी हैं। धौलपुर का गैस पॉवर प्लांट और बाड़मेर का एक प्लांट तो गत कई साल से बंद पड़ा है। उनके अतिरिक्त वर्तमान में नौ से 11 यूनिट उत्पादन निगम की बंद पड़ी हैं, जिस कारण चार रुपये की दर से उपलब्ध होने वाली बिजली कम मिल पा रही है और महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।
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भगवान भरोसे बिजली निगम...
प्रशासनिक ढ़ाचे की बात की जाए तो बिजली निगम भगवान भरोसे ही चल रहे हैं। क्योंकि पांचो निगमों में निदेशक तकनीकी एवं वित्त के पद कई समय से रिक्त चल रहे हैं, जिस कारण पॉवर परचेस के काम का प्रबंधन सही प्रकार नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा कारण राजनैतिक हस्तक्षेप है। राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण समय पर निदेशकों की नियुक्ति नहीं हो पाती है और प्रबंधन सही प्रकार नहीं हो पाता है। उत्पादन निगम में तो कुछ दिन पहले निदेशक से लेकर अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तक के पद रिक्त थे, जो 2000 से लेकर अब तक पहली बार हुआ।

घाटा एक लाख करो़ड़ तक पहुंचा...
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, पहले ही राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण गलत नीतियां निगमों पर थोपी जा रही हैं, जिससे निगमों का घाटा फिर से एक लाख करोड़ पहुंच गया है। अब अगर महंगी दर पर बिजली खरीद पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो इस घाटे का खामियाजा कर्मचारियों के साथ आने वाले समय में बिजली की दर अधिक होने पर उपभोक्ता को भी उठाना पड़ेगा।

राजस्थान विद्युत कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री अमित मल्होत्रा का कहना है, सरकार एक और बिजली कंपनियों को बिजनस मॉडल अपनाकर घाटा कम करने की बात करती है। वहीं, दूसरी ओर राजनैतिक हस्तक्षेप कर अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य ही नहीं करने देती। गत साल 17-18 रुपये प्रति यूनिट की दर से महंगी बिजली खरीदी गई। छह महीने में 12 रुपये की दर से लगभग 1000 करोड़ की महंगी बिजली खरीद कर निगमों का घाटा बढ़ाया गया। बिजली चोरों को संरक्षण प्रदान कर कर्मचारी और अधिकारी पर मारपीट करने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।


उपभोक्ताओं को भी कटौती का सामना करना पड़ेगा... 
अमित मल्होत्रा का कहना है, अगर राज्य सरकार मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बिजली खरीदती है तो महंगी बिजली का पैसा राज्य सरकार को देना चाहिए, ताकि निगमों का वित्तीय ढ़ांचा सुदृढ़ हो। इस महंगी बिजली का भुगतान करने से पांच निगमों को समय से वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिसका संगठन विरोध करता है। ऐसी ही परिस्थिति रही तो केंद्र सरकार की सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, जब गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ेगी तो बिजली कंपनी इसका प्रबंधन सही प्रकार नहीं कर पाएगी और वेतन के लिए भी पैसे उपलब्ध नहीं होने के साथ ही उपभोक्तओं को भी कटौती का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए अभी से सरकार को वित्त उपलब्ध करवाना चाहिए। कोयले की कमी एवं मेंटेनेंस के कारण इकाइयां बंद करने पर रोक लगाने के प्रयास करने चाहिए।

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