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IAS ने लगाया आरोप, राजेन्द्र मिर्धा कांड का पुलिस ने लिया झूठा श्रेय

Mon, 31 Jul 2017 08:22 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 31 Jul 2017 08:22 PM IST
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 Police seized fake credentials of Rajendra Mirdha Kand
शहर की अधीनस्थ अदालत में आज राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड की सुनवाई के दौरान आईएएस हनुमंतसिंह भाटी ने प्रार्थना पत्र पेश कर पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि कलक्टर ने मार्च 1995 को प्रमुख गृह सचिव को रिपोर्ट देकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था।
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प्रार्थना पत्र में कहा गया कि पुलिस को इस रिपोर्ट पर ही एफआईआर दर्ज करनी थी, लेकिन पुलिस ने वास्तविक तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। प्रकरण में अन्तरराष्ट्रीय आतंकवादियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में केवल उसकी ही भूमिका थी, लेकिन पुलिस ने आरोप पत्र में इसका हवाला नहीं दिया। पुलिस प्रशासन ने अनुचित रूप से सफलता लेने के लिए वास्तविक तथ्यों को बदलते हुए चार्जशीट पेश की।
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प्रार्थना पत्र में कहा गया कि 7 मार्च 1995 को सभांगीय आयुक्त ने भी तत्कालीन एडीएम जयपुर सिटी हनुमंतसिंह भाटी की मुख्य भूमिका को प्रमाणित माना था। प्रकरण में उसने परमाणु यूरेनियम, स्वचलित हथियार और भारी मात्रा में डिटोनेटर बरामद किए थे, लेकिन आरोप पत्र में इसका खुलासा भी नहीं किया गया। ऐसे में इन तथ्यों के संबंध में प्रमुख गृह सचिव और डीजीपी से शपथ पत्र मांगा जाए। प्रार्थना पत्र के साथ पेश शपथ पत्र में भाटी ने कहा कि आतंकी शहर के करीब बीस स्थानों पर रुके थे। आतंकी समूह की पीतल फैक्ट्री और वैशाली नगर में दो जिम भी थी। वैशाली नगर जिम का शुभारंभ तो तत्कालीन डीजीपी वीके थानवी ने किया था। प्रार्थना पत्र पर अदालत एक अगस्त को सुनवाई करेगी। 
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गौरतलब है कि कांग्रेसी नेता रामनिवास मिर्धा के पुत्र राजेन्द्र मिर्धा का 17 फरवरी 1995 को अपहरण हुआ था। जिसे छोडने की एवज में देवेन्द्रसिंह भुल्लर को पंजाब पुलिस से छुडाने की शर्त रखी गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके पर नवनीत कादिया का एनकाउंटर कर राजेन्द्र मिर्धा को छुडाया। वहीं दो अन्य आरोपियों खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के प्रमुख दयासिंह लाहौरिया व उसकी पत्नी सुमन को बाद में गिरफ्तार किया गया। प्रकरण में 2004 में अदालत दयासिंह को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी को सात साल की सजा हो चुकी है। जबकि बाद में हरनेकसिंह को गिरफ्तार किया गया। जिससे मामले की पुन: सुनवाई आरंभ हुई।
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