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उर्स में खुला जन्नती दरवाजा, जायरीन ने की जियारत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 01 Jul 2017 04:41 PM IST
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जन्नती दरवाजा
- फोटो : amar ujala
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अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के गुरु ख्वाजा उस्मान हारूनी का उर्स शानौ शौकत से मनाया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में जायरीन शिरकत करने आए हैं। जायरीन के लिए दरगाह का जन्नती दरवाजा भी आज अलसुबह खोल दिया गया। इसके बाद जायरीनों में जन्नत के दरवाजे से जियारत करने की होड़ लगी है।
सूफी संत ख्वाजा साहब के गुरू ख्वाजा उस्मान हारूनी के उर्स का आगाज आज हो गया। इससे पहले शुक्रवार रात्रि में दरगाह के महफिल खाने में महफिल की रस्म हुई। इसमें शाही कव्वालों ने सूफियाना कलाम प्रस्तुत कर जायरीनों को झूमने पर मजबूर कर दिया। आज सुबह जन्नती दरवाजा भी खोल दिया गया। जायरीनों ने जन्नती दरवाजे से होकर जियारत की।
खादिम कुतुबुद्दीन सखी ने बताया कि जन्नती दरवाजा खुलने और बंद होने का भी एक निश्चित समय है। यह वर्ष में चार बार खुलता है। ख्वाजा साहब के उर्स में रजब माह की चांद रात से 6 रजब तक यानी 7 दिन तक खुला रहेगा। इसके बाद रमजान माह की ईद को सुबह पांच बजे से लेकर दोपहर डेढ़ बजे तक खोला जाता है। ख्वाजा साहब के गुरू हजरत उस्मान हारूनी के उर्स के मौके पर भी सुबह पांच बजे खुलकर दोपहर डेढ़ बजे बंद किया जाता है। इसी तरह बकरा ईद पर भी दरवाजा खोला जाता है।
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सूफी संत ख्वाजा साहब के गुरू ख्वाजा उस्मान हारूनी के उर्स का आगाज आज हो गया। इससे पहले शुक्रवार रात्रि में दरगाह के महफिल खाने में महफिल की रस्म हुई। इसमें शाही कव्वालों ने सूफियाना कलाम प्रस्तुत कर जायरीनों को झूमने पर मजबूर कर दिया। आज सुबह जन्नती दरवाजा भी खोल दिया गया। जायरीनों ने जन्नती दरवाजे से होकर जियारत की।
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खादिम कुतुबुद्दीन सखी ने बताया कि जन्नती दरवाजा खुलने और बंद होने का भी एक निश्चित समय है। यह वर्ष में चार बार खुलता है। ख्वाजा साहब के उर्स में रजब माह की चांद रात से 6 रजब तक यानी 7 दिन तक खुला रहेगा। इसके बाद रमजान माह की ईद को सुबह पांच बजे से लेकर दोपहर डेढ़ बजे तक खोला जाता है। ख्वाजा साहब के गुरू हजरत उस्मान हारूनी के उर्स के मौके पर भी सुबह पांच बजे खुलकर दोपहर डेढ़ बजे बंद किया जाता है। इसी तरह बकरा ईद पर भी दरवाजा खोला जाता है।
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जन्नती दरवाजे के पीछे यह है मान्यता
जन्नती दरवाजा
माना जाता है कि दरगाह के जन्नती दरवाजे से गुजरने से जन्नत नसीब होती है। यह दरवाजा साल में केवल चार बार ही खोला जाता है। इस दरवाजे से गुजरने के लिए अकीदतमंद घंटों तक लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। खादिम कुतुबुद्दीन सखी बताते हैं कि ख्वाजा गरीब नवाज इबादत के लिए इसी रास्ते को काम में लेते थे। ख्वाजा साहब को अल्लाह ने यह कहा कि जो लोग मक्का मदीना की जियारत नहीं कर पाते, वह यदि इस दरवाजे से गुजर जाएंगे तो उनकी वहां की यात्रा मान ली जाएगी।
साथ ही, सभी दुआएं और मन्नतें भी कुबूल होंगी। सखी ने बताया कि अल्लाह के इस संदेश को ख्वाजा साहब ने अपने खिदमतगारों के जरिये अकीदतमंदों तक पहुंचाया। इसके बाद से दरगाह के जन्नती दरवाजे से होकर पवित्र मजार तक जाने के लिए जायरीन उत्सुक रहते हैं।
इस दरवाजे से लाखों की संख्या में अकीदतमंद गुजर कर ख्वाजा साहब की मजार तक जाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर मन्नत का धागा खोलने और शुकराना अदा करने भी अकीदतमंद यहां आते हैं।
साथ ही, सभी दुआएं और मन्नतें भी कुबूल होंगी। सखी ने बताया कि अल्लाह के इस संदेश को ख्वाजा साहब ने अपने खिदमतगारों के जरिये अकीदतमंदों तक पहुंचाया। इसके बाद से दरगाह के जन्नती दरवाजे से होकर पवित्र मजार तक जाने के लिए जायरीन उत्सुक रहते हैं।
इस दरवाजे से लाखों की संख्या में अकीदतमंद गुजर कर ख्वाजा साहब की मजार तक जाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर मन्नत का धागा खोलने और शुकराना अदा करने भी अकीदतमंद यहां आते हैं।