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इस एमपी की प्रेसवार्ता में बंटे 500-500 के नोट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 12 Apr 2017 05:35 PM IST
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सांसद अर्जुनलाल
- फोटो : amar ujala
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उदयपुर के सांसद अर्जुनलाल मीणा की बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस विवाद में फंस गई है। मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस के बाद पत्रकारों को लिफाफे बांटे। इन लिफाफों में थे 500—550 के नोट।
दरअसल मीणा ने केन्द्र सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। प्रेस कांफ्रेंस में योजनाओं का जमकर बखान किया। इसके बाद सभी पत्रकारों को एक—एक लिफाफा थमाया गया। लिफाफे में 500—500 रुपए के नोट थे। ये देख कुछ पत्रकारों ने लिफाफे लेने से इनकार कर दिया और सांसद के इस कदम की निंदा की तो आयोजक एमपी और उनके कार्यकर्ता मामला संभालने का प्रयास करने लगे। कार्यकर्ताओं की सफाई भी ऐसी की गले नहीं उतरे।
कार्यकर्ताओं ने कहा किसी व्यक्ति ने सांसद अर्जुनलाल मीणा को गलत राय दे दी, जिसके चलते ऐसा हुआ। इस दौरान पत्रकारों ने सांसद से भी सवाल किया कि आखिर आपको यह गलत राय दी किसने? इस पर सांसद भी नजरे बचाते रहे और बगले झांकने लगे।
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कार्यकर्ताओं से भी उनकी सफाई पर सवाल पूछे गए कि आप यदि ये लिफाफे नहीं लाए तो इन्हें लाया कौन? कहां से ये लिफाफे आए? इस पर भी वहां मौजूद कोई भी पार्टी कार्यकर्ता स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। कार्यकर्ता यही बोलते रहे कि किसी की राय से ये गलत काम हो गया है, आप इसे अन्यथा नहीं लें।
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दरअसल मीणा ने केन्द्र सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। प्रेस कांफ्रेंस में योजनाओं का जमकर बखान किया। इसके बाद सभी पत्रकारों को एक—एक लिफाफा थमाया गया। लिफाफे में 500—500 रुपए के नोट थे। ये देख कुछ पत्रकारों ने लिफाफे लेने से इनकार कर दिया और सांसद के इस कदम की निंदा की तो आयोजक एमपी और उनके कार्यकर्ता मामला संभालने का प्रयास करने लगे। कार्यकर्ताओं की सफाई भी ऐसी की गले नहीं उतरे।
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कार्यकर्ताओं ने कहा किसी व्यक्ति ने सांसद अर्जुनलाल मीणा को गलत राय दे दी, जिसके चलते ऐसा हुआ। इस दौरान पत्रकारों ने सांसद से भी सवाल किया कि आखिर आपको यह गलत राय दी किसने? इस पर सांसद भी नजरे बचाते रहे और बगले झांकने लगे।
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कार्यकर्ताओं से भी उनकी सफाई पर सवाल पूछे गए कि आप यदि ये लिफाफे नहीं लाए तो इन्हें लाया कौन? कहां से ये लिफाफे आए? इस पर भी वहां मौजूद कोई भी पार्टी कार्यकर्ता स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। कार्यकर्ता यही बोलते रहे कि किसी की राय से ये गलत काम हो गया है, आप इसे अन्यथा नहीं लें।