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नेता-अफसर को बचाने वाले बिल से विवादों में घिरी सरकार, मंत्री दे रहे हैं सफाई
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 21 Oct 2017 01:51 PM IST
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फाइल फोटो।
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नौकरशाहों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए अब खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। आमजन की मुश्किलें बढ़ाने के लिए राजस्थान सरकार कुछ ऐसा ही बिल लाने जा रही है।
राजस्थान विधानसभा के सोमवार से प्रारंभ हो रहे सत्र में इस बिल को पेश किया जाएगा। बिल के मसौदे के अनुसार किसी भी राज्य के नौकरशाह के खिलाफ कानूनी शिकायत राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद ही दर्ज हो सकेगी।
वहीं मीडिया में ऐसे लोगों का नाम तभी छपेगा जब सरकार की मंजूरी होगी। लेकिन मीडिया पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध को लेकर अब राजे सरकार विवादों में घिर गई है। बिल पर उठ रहे सवालों पर राजस्थान के पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने सफाई दी है।
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राजस्थान विधानसभा के सोमवार से प्रारंभ हो रहे सत्र में इस बिल को पेश किया जाएगा। बिल के मसौदे के अनुसार किसी भी राज्य के नौकरशाह के खिलाफ कानूनी शिकायत राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद ही दर्ज हो सकेगी।
वहीं मीडिया में ऐसे लोगों का नाम तभी छपेगा जब सरकार की मंजूरी होगी। लेकिन मीडिया पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध को लेकर अब राजे सरकार विवादों में घिर गई है। बिल पर उठ रहे सवालों पर राजस्थान के पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने सफाई दी है।
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मंत्री आए बचाव में
राजेन्द्र सिंह राठौड़
मंत्री का कहना है कि नौकरशाहों के खिलाफ इस्तगासे के जरिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ गई है, जिससे नौकरशाह विकास के काम नहीं कर पा रहे है।
उनका कहना है कि इस बिल का मुख्य मकसद नौकराशाहों को बदनाम करने से रोकना है न कि मीडिया पर सेंसरशिप लगाना। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के इस तानाशाह बिल को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर सरकार की खिंचाई हो रही है।
उनका कहना है कि इस बिल का मुख्य मकसद नौकराशाहों को बदनाम करने से रोकना है न कि मीडिया पर सेंसरशिप लगाना। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के इस तानाशाह बिल को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर सरकार की खिंचाई हो रही है।