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कट आॅफ डेट बदली, अब हो सकेगा इस दिन तक बसी कॉलोनियों का नियमन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 17 May 2017 09:21 PM IST
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राजेन्द्र सिंह
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राज्य सरकार ने राजस्थान में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन को लेकर एक अहम फैसला लिया है। इस फैसले से हजारों कॉलोनियों के नियमन का रास्ता साफ हो जाएगा।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन की कट आॅफ डेट बढ़ा दी है। संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी जनकल्याण शिविर में कृषि भूमि पर बसी कॉलोेनियों का नियमन के लिए पहले 1999 की कटऑफ निर्धारित थी जिसे अब 2 मई, 2012 तक कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले से शहरी इलाकों में बसी अवैध कॉलोनियों के नियमन की राह और आसान हो जाएगी। इस बारे में दिशा—निर्देश जल्दी ही जारी किए जाएंगे। राठौड़ ने बताया कि शहरी जनकल्याण शिविरों में अब तक 3088 पट्टे जारी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि इस प्रगति को लेकर सीएम राजे ने नाराजगी जाहिर की। बैठक में सामने आया कि नियमन की कट आॅफ डेट में बदलाव तथा कुछ अन्य रियायतें दी जानी चाहिए। इस पर कट आॅफ डेट बढ़ाने का निर्णय किया गया।
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राठौड़ ने बताया कि बैठक में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण पट्टा वितरण अभियान की समीक्षा की गई। अभियान के तहत 3245 ग्राम पंचायतों में शिविर लगाकर अब तक 1 लाख 13 हजार 798 पट्टे जारी किए गए हैं तथा 1 लाख 59 हजार 678 पट्टे प्रक्रियाधीन हैं। राजस्थान पंचायती राज नियम-1996 के नियम 157(1) में संशोधन कर पुराने घरों को विनियमित कर पट्टे देने के लिए कटऑफ वर्ष 1996 से बढ़ाकर 31 दिसम्बर, 2016 की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी विस्तार के लिए भूमि सेट अपार्ट की जिला कलक्टर की शक्तियां उपखण्ड अधिकारी को प्रत्यायोजित की गई है।
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज ऑफ फिजीशियन/सर्जन मुम्बई से अनुबंध किया है, जिसके तहत राज्य के चयनित चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों को विभिन्न विषयाें में दो वर्षीय डिप्लोमा एवं तीन वर्षीय फैलोशिप पाठ्यक्रम करवा जा सकेंगे। इन संस्थानों में ऎसे 21 डिप्लोमा एवं 5 फैलोशिप पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों में कुल 266 सीटें होंगी, जिनमें से 50 प्रतिशत सेवारत चिकित्सकों एवं 50 गैर सेवारत चिकित्सकों के लिए होंगी। चयनित चिकित्सकों के अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनके डिप्लोमा एवं फैलोशिप प्रमाणपत्र निदेशक (जन स्वास्थ्य) के कार्यालय में तीन साल तक जमा रहेंगे। इन चिकित्सकों को तीन साल तक राजस्थान सरकार के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देना बाध्यकारी होगा।
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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन की कट आॅफ डेट बढ़ा दी है। संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी जनकल्याण शिविर में कृषि भूमि पर बसी कॉलोेनियों का नियमन के लिए पहले 1999 की कटऑफ निर्धारित थी जिसे अब 2 मई, 2012 तक कर दिया गया है।
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सरकार के इस फैसले से शहरी इलाकों में बसी अवैध कॉलोनियों के नियमन की राह और आसान हो जाएगी। इस बारे में दिशा—निर्देश जल्दी ही जारी किए जाएंगे। राठौड़ ने बताया कि शहरी जनकल्याण शिविरों में अब तक 3088 पट्टे जारी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि इस प्रगति को लेकर सीएम राजे ने नाराजगी जाहिर की। बैठक में सामने आया कि नियमन की कट आॅफ डेट में बदलाव तथा कुछ अन्य रियायतें दी जानी चाहिए। इस पर कट आॅफ डेट बढ़ाने का निर्णय किया गया।
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राठौड़ ने बताया कि बैठक में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण पट्टा वितरण अभियान की समीक्षा की गई। अभियान के तहत 3245 ग्राम पंचायतों में शिविर लगाकर अब तक 1 लाख 13 हजार 798 पट्टे जारी किए गए हैं तथा 1 लाख 59 हजार 678 पट्टे प्रक्रियाधीन हैं। राजस्थान पंचायती राज नियम-1996 के नियम 157(1) में संशोधन कर पुराने घरों को विनियमित कर पट्टे देने के लिए कटऑफ वर्ष 1996 से बढ़ाकर 31 दिसम्बर, 2016 की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी विस्तार के लिए भूमि सेट अपार्ट की जिला कलक्टर की शक्तियां उपखण्ड अधिकारी को प्रत्यायोजित की गई है।
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज ऑफ फिजीशियन/सर्जन मुम्बई से अनुबंध किया है, जिसके तहत राज्य के चयनित चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों को विभिन्न विषयाें में दो वर्षीय डिप्लोमा एवं तीन वर्षीय फैलोशिप पाठ्यक्रम करवा जा सकेंगे। इन संस्थानों में ऎसे 21 डिप्लोमा एवं 5 फैलोशिप पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों में कुल 266 सीटें होंगी, जिनमें से 50 प्रतिशत सेवारत चिकित्सकों एवं 50 गैर सेवारत चिकित्सकों के लिए होंगी। चयनित चिकित्सकों के अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनके डिप्लोमा एवं फैलोशिप प्रमाणपत्र निदेशक (जन स्वास्थ्य) के कार्यालय में तीन साल तक जमा रहेंगे। इन चिकित्सकों को तीन साल तक राजस्थान सरकार के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देना बाध्यकारी होगा।