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आॅपरेशन टेबल पर ज्यादा दी बेहोशी की दवा, अब देने पड़ेंगे लाखों
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 13 Oct 2017 08:00 PM IST
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राज्य उपभोक्ता आयोग ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की मौत होने पर करौली के डॉ.सी.के. शर्मा नर्सिंग होम पर बीस लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। इसके साथ ही आयोग ने अस्पताल प्रशासन को 21 हजार रुपए परिवाद व्यय के तौर पर अतिरिक्त अदा करने को कहा है।
आयोग ने यह आदेश संपत्ति शर्मा व अन्य की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। आयोग ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कारण रहा कि एसपी ने घटना के एक साल बाद मेडिकल बोर्ड गठित कराया और पुलिस जांच इस अवधि में लंबित रही? अधिवक्ता शशिभूषण गुप्ता ने बताया कि परिवादी का पति सुमेरसिंह छोटासा ऑपरेशन कराने के लिए 14 दिसंबर 2009 को सीके शर्मा नर्सिंग होम में भर्ती हुआ था। ऑपरेशन के लिए डॉ.सी.के शर्मा ने बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद ऑपेरशन के दौरान सुमेर की मौत हो गई।
इस पर पीड़ित पक्ष ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इस संबंध में गठित मेडिकल बोर्ड ने माना कि मौत बेहोशी की दवा अधिक देने से हुई। परिवाद में कहा गया कि डॉ. शर्मा एनेस्थिया के विशेषज्ञ न होकर सामान्य सर्जन थे। वहीं पुलिस ने एक साल बाद एक अन्य मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया।
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इस मेडिकल बोर्ड ने अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। जिसके चलते पुलिस ने प्रकरण में एफआर लगा दी। इस पर परिवादी की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए आयोग में परिवाद पेश किया।
जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने अस्पताल प्रशासन को दोषी मानते हुए बीस लाख रुपए का हर्जाना लगाया है।
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आयोग ने यह आदेश संपत्ति शर्मा व अन्य की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए। आयोग ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कारण रहा कि एसपी ने घटना के एक साल बाद मेडिकल बोर्ड गठित कराया और पुलिस जांच इस अवधि में लंबित रही? अधिवक्ता शशिभूषण गुप्ता ने बताया कि परिवादी का पति सुमेरसिंह छोटासा ऑपरेशन कराने के लिए 14 दिसंबर 2009 को सीके शर्मा नर्सिंग होम में भर्ती हुआ था। ऑपरेशन के लिए डॉ.सी.के शर्मा ने बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद ऑपेरशन के दौरान सुमेर की मौत हो गई।
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इस पर पीड़ित पक्ष ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इस संबंध में गठित मेडिकल बोर्ड ने माना कि मौत बेहोशी की दवा अधिक देने से हुई। परिवाद में कहा गया कि डॉ. शर्मा एनेस्थिया के विशेषज्ञ न होकर सामान्य सर्जन थे। वहीं पुलिस ने एक साल बाद एक अन्य मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया।
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इस मेडिकल बोर्ड ने अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। जिसके चलते पुलिस ने प्रकरण में एफआर लगा दी। इस पर परिवादी की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए आयोग में परिवाद पेश किया।
जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने अस्पताल प्रशासन को दोषी मानते हुए बीस लाख रुपए का हर्जाना लगाया है।