{"_id":"5a69e0c84f1c1b87268b665e","slug":"jaipur-literature-festival-zakir-hussain-opens-a-secret-of-his-life","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पिता मना नहीं करते तो मैं भी मुगल-ए-आजम में बनता एक्टर, उस्ताद ने खोले जिंदगी के राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिता मना नहीं करते तो मैं भी मुगल-ए-आजम में बनता एक्टर, उस्ताद ने खोले जिंदगी के राज
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 25 Jan 2018 07:59 PM IST
विज्ञापन
जाकिर हुसैन
- फोटो : amar ujala
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में एक दिग्गज संगीतकार ने ऐसा खुलासा किया कि सुनने वाले दंग रह गए। उन्होंने बताया कि उनके पास के.आसिफ की फिल्म मुगल-ए-आजम में एक्टिंग करने का मौका था, लेकिन पिता ने मना कर दिया।
दरअसल, ये कहना है मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन का। जाकिर आज से जयपुर के डिग्गी पैलेस में शुरू हुए जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता मोहन स्टूडियो में संगीतकार थे, जहां फिल्म मुगल-ए-आजम की शूटिंग हो रही थी। वहां गाना 'प्यार किया तो डरना क्या...' फिल्माया जा रहा था। इसी दौरान जाकिर भी वहां खड़े थे। तभी के. आसिफ ने जाकिर हुसैन को देखा और जाकिर के पिता को अपने पास बुलाकर सलीम के छोटे भाई का रोल देने का प्रस्ताव दिया।
जाकिर ने बताया कि पिता ने मना करते हुए कहा कि मेरा बेटा संगीत में नाम कमाएगा, एक्टर नहीं बनेगा।
विज्ञापन
दरअसल, ये कहना है मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन का। जाकिर आज से जयपुर के डिग्गी पैलेस में शुरू हुए जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता मोहन स्टूडियो में संगीतकार थे, जहां फिल्म मुगल-ए-आजम की शूटिंग हो रही थी। वहां गाना 'प्यार किया तो डरना क्या...' फिल्माया जा रहा था। इसी दौरान जाकिर भी वहां खड़े थे। तभी के. आसिफ ने जाकिर हुसैन को देखा और जाकिर के पिता को अपने पास बुलाकर सलीम के छोटे भाई का रोल देने का प्रस्ताव दिया।
विज्ञापन
जाकिर ने बताया कि पिता ने मना करते हुए कहा कि मेरा बेटा संगीत में नाम कमाएगा, एक्टर नहीं बनेगा।
मां चाहती थी कि डॉक्टर बनूं
जाकिर हुसैन
- फोटो : अमर उजाला
जेएलएफ में जाकिर हुसैन ने कहा कि जब बचपन से ही कान में तबले की आवाज सुनाई दे तो बच्चा बड़ा होकर संगीतकार ही बनेगा। मां मुझे डॉक्टर, इंजीनियर बनाना चाहती थी। बचपन में सुबह 3 बजे रियाज के लिए उठना पढ़ता था और रात को जब सारी दुनिया सो रही थी तब पिता तबले की बारिकियां सिखाते थे। वही मेरे लिए जिंदगी की सबसे बड़ी प्रार्थना है।
जाकिर के साथ इस सेशन में लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर के साथ संजाय के. रॉय भी मौजूद थे।
जाकिर के साथ इस सेशन में लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर के साथ संजाय के. रॉय भी मौजूद थे।