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बनास नदी में अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों को जारी किए नोटिस
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 27 Apr 2017 07:08 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण सचिव, खान सचिव, प्रमुख राजस्व सचिव, प्रमुख पीएचईडी सचिव, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल, टोंक कलक्टर और एसपी सहित अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि बनास नदी में अवैध बजरी खनन को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सरताज मोहम्मद व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि बनास नदी में बजरी खनन को लेकर एलओआई होल्डर्स नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं। नियमानुसार तीन मीटर की गहराई में ही खनन हो सकता है, लेकिन नदी में दस मीटर से अधिक गहराई में खनन हो रहा है। इसके अलावा नदी के एक किलोमीटर चौड़े पाट के दोनों किनारों को छोड़कर तीन चौथाई हिस्से में ही खनन कार्य का प्रावधान है।
वहीं खनन कर खोदे गए स्थान को पुन: भरने का भी प्रावधान है, ताकि पानी के बहाव में रुकावट नहीं आए। इसके अलावा हर एक किलोमीटर के बाद पचास मीटर तक खनन करने पर पाबंदी है। मई 2013 में इस संबंध में शिखा मेहरा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भी यहां अवैध खनन माना था। इसके अलावा जिला कलक्टर 2011 में नदी के 22 किलोमीटर में खनन रोकने को लेकर सरकार को पत्र लिख चुके हैं।
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इसके बावजूद भी खननकर्ताओं ने नियमों को ताक में रखकर नदी में सड़क तक बना दी है। खनन करने वाले हर नियम की अवहेलना कर रहे हैं। जिससे नदी के साथ-साथ आसपास के स्थान का जल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सरताज मोहम्मद व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि बनास नदी में बजरी खनन को लेकर एलओआई होल्डर्स नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं। नियमानुसार तीन मीटर की गहराई में ही खनन हो सकता है, लेकिन नदी में दस मीटर से अधिक गहराई में खनन हो रहा है। इसके अलावा नदी के एक किलोमीटर चौड़े पाट के दोनों किनारों को छोड़कर तीन चौथाई हिस्से में ही खनन कार्य का प्रावधान है।
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वहीं खनन कर खोदे गए स्थान को पुन: भरने का भी प्रावधान है, ताकि पानी के बहाव में रुकावट नहीं आए। इसके अलावा हर एक किलोमीटर के बाद पचास मीटर तक खनन करने पर पाबंदी है। मई 2013 में इस संबंध में शिखा मेहरा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भी यहां अवैध खनन माना था। इसके अलावा जिला कलक्टर 2011 में नदी के 22 किलोमीटर में खनन रोकने को लेकर सरकार को पत्र लिख चुके हैं।
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इसके बावजूद भी खननकर्ताओं ने नियमों को ताक में रखकर नदी में सड़क तक बना दी है। खनन करने वाले हर नियम की अवहेलना कर रहे हैं। जिससे नदी के साथ-साथ आसपास के स्थान का जल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।