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सरकारी फरमान से गड़बड़ाया स्कूलों का बजट

Tue, 14 Mar 2017 11:10 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Tue, 14 Mar 2017 11:10 AM IST
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government edict disturbed the school budget
पंडित दीनदयाल उपाध्याय
राजस्थान शिक्षा विभाग के तुगलकी फरमान और एक विचारधारा को स्कूली किताबों में जबरदस्ती सम्मलित करना स्कूलों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। पहले  महाराणा प्रताप और अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के कारण शिक्षा विभाग के आदेश मीडिया की सुर्खियां बटोर रहें है।
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प्रदेश के शिक्षा निदेशालय के अनुसार सभी सैकेण्डरी व सीनियर सैकेण्डरी स्कूलों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय कि किताबों का एक वॉल्यूम खरीदना अनिवार्य है। इस 15 किताबों के सैट में आरएसएस के प्रचारक और भारतीय जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जर्नल, लेख व उनके दिए विभिन्न भाषणों को सहेजा गया है।
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लेकिन स्कूलों के लिए परेशानी का कारण यह है कि लाईब्रेरी के लिए जो बजट दिया जाता है उससे काफी महंगी यह किताबें है। जानकारी के अनुसार इस सैट की कीमत करीब छह हजार रुपए है। पिछले माह 27 फरवरी को जारी हुआ यह आदेश प्रदेश के करीब 4074 सैकेण्डरी स्कूल व 9000 से अधिक सीनियर सैकेण्डरी स्कूलों को मानना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में संचालित हो रहे 132 मॉडल स्कूलों को भी यह आदेश मानना होगा।
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अधिकारियों को है जानकारी

गौर करने वाली बात यह है कि शिक्षा निदेशालय के अधिकारी स्वयं मानते है कि स्कूलों में प्रतिवर्ष जो लाईब्रेरी के लिए बजट आवंटित किया जाता है वह 1500—2000 के बीच में होता है। जबकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के इस सैट को खरीदने को लिए 6000 रुपए खर्चने होंगे। अब स्कूलों के लिए परेशानी यह है कि इसके लिए पैसे कहां से आएंगे।
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