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कुछ ऐसा हुआ कि दिवाली सेलीब्रेशन कर रहे विदेशी सैलानी अचानक भागने लगे
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 21 Oct 2017 01:38 PM IST
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रिसोर्ट में स्थित टेंटो में आग से उठता धूआं
- फोटो : Amar Ujala
रेतीले धोरों में दिवाली सेलीब्रेशन कर रहे विदेशी सैलानियों में अचानक भगदड़ मच गई। सभी ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई।
दरअसल, जैसलमेर जिले के सम के धारों में स्थित जिस रिसोर्ट में ये सैलानी दिवाली का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे, उसमें रात का आग लग गई। जिस समय ये आग लगी वहां बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। वे देसी-विदेशी संगीत पर झूम रहे थे।
यह घटना जैसलमेर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर लिमरा रिसोर्ट में हुई। यहां पर शॉर्ट सर्किट के कारण कपड़े से बने टेंटों में आग लग गई। वहां पर आग बुझाने के साधन नहीं होने से आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इससे वहां जश्न मना रहे सैलानियों में हड़कंप मच गया। सभी ने रिसोर्ट से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
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दरअसल, जैसलमेर जिले के सम के धारों में स्थित जिस रिसोर्ट में ये सैलानी दिवाली का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे, उसमें रात का आग लग गई। जिस समय ये आग लगी वहां बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। वे देसी-विदेशी संगीत पर झूम रहे थे।
यह घटना जैसलमेर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर लिमरा रिसोर्ट में हुई। यहां पर शॉर्ट सर्किट के कारण कपड़े से बने टेंटों में आग लग गई। वहां पर आग बुझाने के साधन नहीं होने से आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इससे वहां जश्न मना रहे सैलानियों में हड़कंप मच गया। सभी ने रिसोर्ट से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
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- फोटो : Amar Ujala
जैसलमेर के रेतीले धोरों में सम का पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां पर्यटकों के लिए कपड़े से बने अस्थाई टेंट लगाए जाते हैं। पिछले कुछ समय से रेतीले धोरों पर नाईट स्टे का प्रचलन बढ़ा है और सैलानी सम के धोरों पर केमल राइडिंग के बाद रिसोर्ट में पहुंच जाते हैं।
रिसोर्ट में पॉप व लोक संगीत पर झूमने के साथ खाने पीने का लुत्फ उठाते हैं और रिसोर्ट में बने कपड़े के टेंट में ही सो जाते हैं। वहीं सवेरे सूर्योदय का आकर्षक नजारा भी देखते है। यदि आग देर रात में लग जाती तो काफी जनहानि हो सकती थी, क्योंकि टेंट में सोए हुए पर्यटक उस समय स्थिति को नहीं भांप पाते।
रिसोर्ट में पॉप व लोक संगीत पर झूमने के साथ खाने पीने का लुत्फ उठाते हैं और रिसोर्ट में बने कपड़े के टेंट में ही सो जाते हैं। वहीं सवेरे सूर्योदय का आकर्षक नजारा भी देखते है। यदि आग देर रात में लग जाती तो काफी जनहानि हो सकती थी, क्योंकि टेंट में सोए हुए पर्यटक उस समय स्थिति को नहीं भांप पाते।