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शाबास बिटिया ! यूं बनी पिता की 'आंखें' और परिवार को दिया सहारा

Mon, 21 Aug 2017 02:31 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 21 Aug 2017 02:31 PM IST
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Daughter handled family
demo pic - फोटो : demo pic
परिवार पर मुसीबत आई तो ढ़ाल बनकर मासूम बेटी सामने आई। बेटी ने पूरे परिवार का जिम्मा उठाया और अंधे पिता को सहारा दिया। 
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बेटी के साहस की यह कहानी अनूठी है। अपनी हिम्मत के दम पर ये बेटी न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज की पसंद बन गई है। मामला उदयपुर के मावली तहसील मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर बसे डामरा की मगरी का है। यहां रहने वाला भीमा 10 साल पहले पत्थर की खान में मजूदरी करते समय आंखें खो बैठा था। 

इसके बाद परिवार के आर्थिक हालात खराब हो गए। परिवार पर आए संकट में बेटी ने पूरी कमान संभाली। उस समय उसकी बेटी निरमा ने घर की परिस्थितियों से समझौता 10 वर्ष पहले ही पढ़ना छोड़ दिया।
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हर जगह ले जाती है साथ में

Daughter handled family
नेत्रहीन पिता के साथ निरमा - फोटो : अमर उजाला
अब जहां भी पिता जाता है वहां पर पुत्री उसे लेकर जाती है। घर तक जाने के लिए पगडंडियों का सहारा लिया जाता है। वहीं भीमा का मकान भी कच्चा है। साथ ही उसे किसी प्रकार की सरकारी सुविधाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। कच्चा मकान भी गिरने के कगार पर है। वह आए दिन तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर भी लगा रहा है लेकिन उसे राहत नहीं मिल रही है।

 
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