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राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड: 22 साल बाद आरोपी हरनेक सिंह दोषी करार, सजा पर फैसला कल
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 05 Oct 2017 08:21 PM IST
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आरोपी हरनेक सिंह
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जयपुर शहर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-3 ने राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड मामले में आज फैसला सुनाते हुए आरोपी हरनेक सिंह को दोषी करार दिया। मामले में कोर्ट अब कल सजा पर फैसला सुनाएगी। वहीं अदालत ने प्रकरण में पुलिस अभिरक्षा में विस्फोटक गायब होने पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पुलिस ने जानबूझकर विस्फोटक गायब होने दिया है। अदालत ने आदेश की कॉपी डीजीपी और गृह सचिव को भेजते हुए दोषी अफसरों पर उचित कार्रवाई कर अदालत में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
इससे पहले अदालत वर्ष 2004 में प्रकरण में दयासिंह लाहोरिया को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी सुमन को सात साल की सजा सुना चुकी है। गत दिनों बचाव पक्ष की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसले के लिए 5 अक्टूबर तय की थी। इस पर आज आरोपी हरनेक सिंह को दोषी करार दिया।
मामले के अनुसार राजस्थान के कांग्रेसी नेता रामनिवास मिर्धा के पुत्र राजेन्द्र मिर्धा का 17 फरवरी 1995 को अपहरण हुआ था। जिसे छोड़ने की एवज में तीन अपहरणकर्ताओं और उसकी गैंग ने देवेन्द्रसिंह भुल्लर को पंजाब पुलिस से छुड़ाने की शर्त रखी।
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इससे पहले अदालत वर्ष 2004 में प्रकरण में दयासिंह लाहोरिया को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी सुमन को सात साल की सजा सुना चुकी है। गत दिनों बचाव पक्ष की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसले के लिए 5 अक्टूबर तय की थी। इस पर आज आरोपी हरनेक सिंह को दोषी करार दिया।
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मामले के अनुसार राजस्थान के कांग्रेसी नेता रामनिवास मिर्धा के पुत्र राजेन्द्र मिर्धा का 17 फरवरी 1995 को अपहरण हुआ था। जिसे छोड़ने की एवज में तीन अपहरणकर्ताओं और उसकी गैंग ने देवेन्द्रसिंह भुल्लर को पंजाब पुलिस से छुड़ाने की शर्त रखी।
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यूं आतंकियों की चंगुल से मिर्धा को करवाया मुक्त
अपहरणकर्ताओं ने राजेंद्र मिर्धा को जयपुर के मालवीय नगर इलाके के एक मकान में छिपाकर रखा था। इसी बीच वहां दूध देने जाने वाले दूधिए हनुमान को मकान में मौजूद लोगों पर संदेह हुआ। तब उसने इसकी जानकारी मिर्धा की तलाश में जुटी जयपुर पुलिस को दी।
तब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके पर नवनीत कादिया का एनकाउंटर कर राजेन्द्र मिर्धा को छुड़ाया था। वहीं दो अन्य आरोपियों खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के प्रमुख दयासिंह लाहोरिया व उसकी पत्नी सुमन को बाद में गिरफ्तार किया गया।
प्रकरण में 2004 में दयासिंह को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी को सात साल की सजा हो चुकी है। जबकि बाद में हरनेक सिंह को गिरफ्तार किया गया। जिससे मामले की पुन: सुनवाई आरंभ हुई।
तब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके पर नवनीत कादिया का एनकाउंटर कर राजेन्द्र मिर्धा को छुड़ाया था। वहीं दो अन्य आरोपियों खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के प्रमुख दयासिंह लाहोरिया व उसकी पत्नी सुमन को बाद में गिरफ्तार किया गया।
प्रकरण में 2004 में दयासिंह को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी को सात साल की सजा हो चुकी है। जबकि बाद में हरनेक सिंह को गिरफ्तार किया गया। जिससे मामले की पुन: सुनवाई आरंभ हुई।