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आरएएस के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 20 Jun 2017 06:12 PM IST
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- फोटो : google
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर यूआईटी के तत्कालीन सचिव नीशू कुमार अग्निहोत्री के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई अमल में न लाने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश रामचन्द्रसिंह झाला की अवकाशकालीन एकलपीठ ने यह आदेश नीशू कुमार अग्निहोत्री की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विकास सोमानी ने बताया कि 23 मई 2013 को अजमेर निवासी अजमत ने एसीबी में याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत दी कि बतौर यूआईटी सचिव के पद काम करते हुए याचिकाकर्ता ने भूमि की लीज डीड जारी करने के बदले एक लाख रुपए रिश्वत मांगी। जबकि भूमि का पट्टा पहले ही जारी हो चुका था।
घटना के समय याचिकाकर्ता अजमेर में तैनात था, लेकिन शिकायत अजमेर एसीबी की जगह भीलवाडा में की गई। जांच अधिकारी ने भी न तो रिश्वत की मांग का सत्यापन किया और न ही उसे ट्रेप किया गया। एसीबी के पास जो आवाज है, वह भी याचिकाकर्ता की नहीं है। याचिका में कहा गया कि एसीबी ने याचिकाकर्ता को प्रकरण में फंसाने के लिए झूठा मामला बनाया है। ऐसे में उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश रामचन्द्रसिंह झाला की अवकाशकालीन एकलपीठ ने यह आदेश नीशू कुमार अग्निहोत्री की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विकास सोमानी ने बताया कि 23 मई 2013 को अजमेर निवासी अजमत ने एसीबी में याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत दी कि बतौर यूआईटी सचिव के पद काम करते हुए याचिकाकर्ता ने भूमि की लीज डीड जारी करने के बदले एक लाख रुपए रिश्वत मांगी। जबकि भूमि का पट्टा पहले ही जारी हो चुका था।
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घटना के समय याचिकाकर्ता अजमेर में तैनात था, लेकिन शिकायत अजमेर एसीबी की जगह भीलवाडा में की गई। जांच अधिकारी ने भी न तो रिश्वत की मांग का सत्यापन किया और न ही उसे ट्रेप किया गया। एसीबी के पास जो आवाज है, वह भी याचिकाकर्ता की नहीं है। याचिका में कहा गया कि एसीबी ने याचिकाकर्ता को प्रकरण में फंसाने के लिए झूठा मामला बनाया है। ऐसे में उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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