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'लिव इन' के खिलाफ ऐसा फरमान, पर प्रेमी ने नहीं छोड़ा विधवा प्रेमिका का शव
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 07 Feb 2018 08:48 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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किसी फिल्म की कहानी सी एक ऐसी घटना घटी है, जिसने अब लोगों की सोच पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। बारह घंटे तक महिला का शव पड़ा रहा, न परिवार वाले लेने आए न ही समाज के लोग, बाद में महिला का प्रेमी उसके शव को कंधे पर उठा ले गया।
मामला भीलवाड़ा जिले का है। भीलवाड़ा के पास स्थित सुआणा गांव में एक महिला सोहनी देवी की मौत हो गई थी। मौत के बाद समाज की ओर से जारी किए गए फरमान ने अंतिम संस्कार को अटका दिया। जानकारी के मुताबिक महिला के पति की मृत्यु कुछ सालों पहले हो गई थी। उसके बाद से महिला एक युवक के साथ लिव इन में रह ही रही थी।
महिला के इस कदम से उसके परिवार वाले भी खफा थे। महिला की मौत के बाद गांव में फरमान जारी कर दिया गया कि कोई उसके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा। ऐसा करने पर परिणाम अच्छा न होने की बात भी कही गई।
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मामला भीलवाड़ा जिले का है। भीलवाड़ा के पास स्थित सुआणा गांव में एक महिला सोहनी देवी की मौत हो गई थी। मौत के बाद समाज की ओर से जारी किए गए फरमान ने अंतिम संस्कार को अटका दिया। जानकारी के मुताबिक महिला के पति की मृत्यु कुछ सालों पहले हो गई थी। उसके बाद से महिला एक युवक के साथ लिव इन में रह ही रही थी।
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महिला के इस कदम से उसके परिवार वाले भी खफा थे। महिला की मौत के बाद गांव में फरमान जारी कर दिया गया कि कोई उसके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा। ऐसा करने पर परिणाम अच्छा न होने की बात भी कही गई।
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जयपुर लाकर करना पड़ा अंतिम संस्कार
मदद को आगे आए पड़ोसी
बताया जा रहा है कि महिला के पति की मौत के बाद एक दलित युवक नारायण के साथ रह रही थी। उसके बच्चे भी इसके चलते अपने चाचा के पास रहने लगे थे। महिला और नारायण को समाज से बेदखल कर दिया गया था।
कुछ दिनों पहले सोहनी की तबीयत खराब होने के चलते नारायण उसे जयपुर ले आया था। जहां ईलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में जब वो उसे दोबारा गांव ले गया तो गांव वालों ने वहां अंतिम संस्कार नहीं करने देने की बात कह दी। गांव में किसी ने उसका साथ नहीं दिया। ऐसे में शव को कंधे पर उठाकर लाना पड़ा। बाद में नारायण ने जयपुर में लाकर उसका अंतिम संस्कार किया।
कुछ दिनों पहले सोहनी की तबीयत खराब होने के चलते नारायण उसे जयपुर ले आया था। जहां ईलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में जब वो उसे दोबारा गांव ले गया तो गांव वालों ने वहां अंतिम संस्कार नहीं करने देने की बात कह दी। गांव में किसी ने उसका साथ नहीं दिया। ऐसे में शव को कंधे पर उठाकर लाना पड़ा। बाद में नारायण ने जयपुर में लाकर उसका अंतिम संस्कार किया।