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नर्स की मदद से विदेशी नागरिक ने बनवाया था फर्जी सर्टिफिकेट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 10 Jun 2017 08:04 PM IST
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जर्मन नागरिक सईद अहमद ने अपना वीजा एक्सटेंड करवाने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का सहारा लिया। गड़बड़ सामने आने पर जांच शुरू हुई, तो इसमें नए नए खुलासे होने लगे हैं। फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट रियार्ड मेल नर्स ने तैयार किए थे।
जांच में सामने आया कि सईद ने आमेर में जोन कार्यालय में आवेदन किया। इसके साथ दो मेडिकल सर्टिफिकेट भी लगाए। जांच में दोनों मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। शक बिनाह पर पूछताछ की गई तो सामने आया कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने में उसकी मदद एसएमएस अस्पताल के एक मेल नर्स ने की थी। मजेदार बात यह है कि वह मेल नर्स हाल ही में रिटायर हो चुका है। आमेर के रमीज नगर में रहने वाले सईद अहमद ने आमेर में आवेदन किए थे। उनके आवेदनों में जो दो मेडिकल सर्टिफिकेट लगाए गए उनमें से एक न्यूरो सर्जरी विभाग एसएमएस के सहआचार्य का बनाया हुआ था, वहीं दूसरा मेडिकल सर्टिफिकेट ओपीडी एसएमएस से बनाया गया था।
पुलिस ने माना कि एक विदेशी व्यक्ति के लिए एसएमएस अस्पताल की जटिल प्रक्रिया को पूरा करके सर्टिफिकेट बनाना बिना किसी की मदद के संभव नहीं था। इस बात को ध्यान में रखते हुए जांच की गई तो सामने आया कि उसकी मदद करने वाले के रूप में एसएमएस अस्पताल के एक नर्सिंग स्टाफ की मिलीभगत हने की बात सामने आई।
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पुलिस के अनुसार वीजा बढ़ाने के लिए ये मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए गए थे। जिस व्यक्ति ने इन सर्टिफिकेट्स को बनवाने में मदद की वह 31 मई को ही रिटायर्ड हो गया था। फिलहाल मेल नर्स से पूछताछ जारी है।
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जांच में सामने आया कि सईद ने आमेर में जोन कार्यालय में आवेदन किया। इसके साथ दो मेडिकल सर्टिफिकेट भी लगाए। जांच में दोनों मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। शक बिनाह पर पूछताछ की गई तो सामने आया कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने में उसकी मदद एसएमएस अस्पताल के एक मेल नर्स ने की थी। मजेदार बात यह है कि वह मेल नर्स हाल ही में रिटायर हो चुका है। आमेर के रमीज नगर में रहने वाले सईद अहमद ने आमेर में आवेदन किए थे। उनके आवेदनों में जो दो मेडिकल सर्टिफिकेट लगाए गए उनमें से एक न्यूरो सर्जरी विभाग एसएमएस के सहआचार्य का बनाया हुआ था, वहीं दूसरा मेडिकल सर्टिफिकेट ओपीडी एसएमएस से बनाया गया था।
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पुलिस ने माना कि एक विदेशी व्यक्ति के लिए एसएमएस अस्पताल की जटिल प्रक्रिया को पूरा करके सर्टिफिकेट बनाना बिना किसी की मदद के संभव नहीं था। इस बात को ध्यान में रखते हुए जांच की गई तो सामने आया कि उसकी मदद करने वाले के रूप में एसएमएस अस्पताल के एक नर्सिंग स्टाफ की मिलीभगत हने की बात सामने आई।
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पुलिस के अनुसार वीजा बढ़ाने के लिए ये मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए गए थे। जिस व्यक्ति ने इन सर्टिफिकेट्स को बनवाने में मदद की वह 31 मई को ही रिटायर्ड हो गया था। फिलहाल मेल नर्स से पूछताछ जारी है।