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दलित किशोरी का पहले किया अपहरण फिर दुष्कर्म, अब कोर्ट ने किया ये इंसाफ
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 01 Nov 2017 08:04 PM IST
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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दलित नाबालिग किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में अनसूचित जाति जनजाति निवारण न्यायालय ने फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने आरोपी को कठोर आजीवन कारावास और साठ हजार रुपए के जुर्मान से दण्डित किया है।
अनुसूचित जाति जनजाति निवारण न्यायालय के विशिष्ट लोक अभियोजक पंकज जैन ने बताया कि वर्ष 2014 में गंज थाना क्षेत्र में रहने वाले दलित व्यक्ति ने उसकी नाबालिग बेटी का बड़ी नागफणी निवासी जीवराज नाथ द्वारा अपहरण करने की रिपोर्ट दी थी। बाद में जब नाबालिग को दस्तियाब किया गया तो उसने बताया कि जीवराज उसे कई स्थानों पर ले गया और उसके साथ दुराचार किया।
जैन ने बताया कि मामले में अभियोजक पक्ष की ओर से 8 गवाह और 13 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। इसके आधार पर न्यायाधीश बृजमाधुरी शर्मा ने आरोपी जीवराज नाथ को आईपीसी की धारा 363 के तहत सात साल की सजा और दस हजार के जुर्माने, धारा 366 के तहत सात साल की सजा व दस साल का जुर्माना और पोस्को एक्ट में कठोर आजीवन कारावास व चालीस हजार रुपए के जुर्माने से दण्डित करने की सजा सुनाई। घटना के बाद से ही आरोपी पुलिस गिरफ्त में चल रहा है।
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अनुसूचित जाति जनजाति निवारण न्यायालय के विशिष्ट लोक अभियोजक पंकज जैन ने बताया कि वर्ष 2014 में गंज थाना क्षेत्र में रहने वाले दलित व्यक्ति ने उसकी नाबालिग बेटी का बड़ी नागफणी निवासी जीवराज नाथ द्वारा अपहरण करने की रिपोर्ट दी थी। बाद में जब नाबालिग को दस्तियाब किया गया तो उसने बताया कि जीवराज उसे कई स्थानों पर ले गया और उसके साथ दुराचार किया।
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जैन ने बताया कि मामले में अभियोजक पक्ष की ओर से 8 गवाह और 13 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। इसके आधार पर न्यायाधीश बृजमाधुरी शर्मा ने आरोपी जीवराज नाथ को आईपीसी की धारा 363 के तहत सात साल की सजा और दस हजार के जुर्माने, धारा 366 के तहत सात साल की सजा व दस साल का जुर्माना और पोस्को एक्ट में कठोर आजीवन कारावास व चालीस हजार रुपए के जुर्माने से दण्डित करने की सजा सुनाई। घटना के बाद से ही आरोपी पुलिस गिरफ्त में चल रहा है।
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