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अजमेर दरगाह ब्लास्ट केस में बड़ा सवाल, कहां छिपे हैं 4 आरोपी?

Wed, 08 Mar 2017 09:23 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Wed, 08 Mar 2017 09:23 PM IST
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Ajmer Dargah blast case, big question- Where are the four accused even after nine years?
अजमेर ब्लास्ट - फोटो : amar ujala
अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में आहता— ए— नूर पेड़ के पास 11 अक्टूबर 2007 को हुए बम ब्लास्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आखिरकार बुधवार को आ गया। लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी मुंह बाए खड़ा है कि आखिर 9 साल बाद भी कहां है चार आरोपी? हालांकि इस मामले में आरोपी देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया। इनमें सुनील जोशी की गिरफ्तारी से पहले ही हत्या हो गई थी।
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इस प्रकरण में नामजद सुरेश नायर, संदीप डांगे, रामचंद्र कलसांगरा व अमित उर्फ हकला प्रिय अभी भी फरार हैं। जिनका नौ साल बीतने के बाद भी कुछ पता नहीं चला है। सवाल यह कि आखिर ये चारों आरोपी कहां है? वे कहां फरारी काट रहे हैं? वे इसी देश में है या फिर देश से बाहर? कौन उन्हें छिपने में मदद कर रहा है और क्यों? एनआईए जैसी राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियां उन्हें पकड़ने में कैसे नाकाम रहीं? इनके जवाब आज भी ब्लास्ट में मारे गए लोगों के परिजन तलाश रहे हैं। लेकिन अभी तक उनके सवालों के जवाब कोई देने को तैयार नहीं है।
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ये सात आरोपी हुए बरी

इस केस में नभकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, चन्द्रशेखर लेवे, लोकेश शर्मा, हर्षद सोलंकी, मुकेश वासानी, मफत उर्फ मेहुल और भरत मोहन रतेश्वर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दोषसिद्ध किए आरोपियों को हत्या और हत्या के प्रयास से दोषमुक्त किया जाता है। अदालत ने बरी किए आरोपियों को पचास-पचास हजार रुपए की दो जमानतें और एक लाख रुपए का मुचलका पेश करने को कहा है। 
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इन धाराओं में दोषी करार हुए
आरोपियों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने सहित आपराधिक षडयंत्र और विस्फोटक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ विधि विरूद्ध क्रिया कलाप निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्ध किया है।


इस तरह चली पुलिस की कार्रवाई

घटना को लेकर 20 अक्टूबर 2010 को एटीएस ने देवेन्द्र, चंद्रशेखर लेवे और लोकेश के खिलाफ पहला आरोप पत्र पेश किया। वहीं 1 अप्रैल 2011 को मामले की जांच एटीएस से एनआईए को सौंपी गई थी। एनआईए ने 28 अप्रैल 2011 को हर्षद और मुकेश के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया। इसके बाद 18 जुलाई 2011 को असीमानंद और भरत के खिलाफ एनआईए ने विशेष न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। एनआईए की ओर से इसके बाद मेहुल और भावेश सहित अन्य के खिलाफ चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से ओर से कुल 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। जिनमें 27 गवाह पक्षद्रोही हो गए। एनआईए ने कोर्ट में 451 दस्तावेज पेश किए गए।
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