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हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को तलब किया, यह है वजह
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 04 Jul 2017 06:54 PM IST
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कोर्ट
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एक करोड़ रुपए की ठगी के मामले में चल रही पुलिस की लचर जांच पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में जयपुर पुलिस कमिश्नर को तलब किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनवारी लाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश अंबर अग्रवाल की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए आज दिए। सुनवाई के दौरान बनीपार्क थानाधिकारी व प्रकरण के जांच अधिकारी अदालत में पेश हुए। इस प्रकरण में मुख्य आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है और न ही ठगी की रकम बरामद हुई है।
जमानत अर्जी में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि हीरसिंह ने इन्वेस्ट के नाम पर एक करोड नौ लाख रुपए की ठगी करने को लेकर गत 3 नवंबर को बनीपार्क थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें पुलिस ने मुख्य आरोपी आरके खंडेलवाल को गिरफ्तार नहीं किया है। मुख्य आरोपी याचिकाकर्ता का रिश्तेदार है, उसने मथुरा में जमीन का सौदा होने की बात कहकर याचिकाकर्ता के खाते में नौ लाख रुपए पीडित से जमा कराए और बाद में राशि खुद ले ली। इसके बदले हुए दस हजार रुपए कमीशन दिया गया।
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याचिका में कहा गया कि प्रकरण में उसकी कोई भूमिका नहीं है। पुलिस जानबूझकर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही और न ही कोई राशि बरामद हुई है। जबकि जांच में सामने आ चुका है कि मुख्य आरोपी ने ठगी गई राशि से मकान खरीदा है। इस पर अदालत ने लचर जांच पर नाराजगी जताते हुए पुलिस कमिश्नर को बुधवार को पेश होने के आदेश दिए हैं।
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राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनवारी लाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश अंबर अग्रवाल की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए आज दिए। सुनवाई के दौरान बनीपार्क थानाधिकारी व प्रकरण के जांच अधिकारी अदालत में पेश हुए। इस प्रकरण में मुख्य आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है और न ही ठगी की रकम बरामद हुई है।
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जमानत अर्जी में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि हीरसिंह ने इन्वेस्ट के नाम पर एक करोड नौ लाख रुपए की ठगी करने को लेकर गत 3 नवंबर को बनीपार्क थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें पुलिस ने मुख्य आरोपी आरके खंडेलवाल को गिरफ्तार नहीं किया है। मुख्य आरोपी याचिकाकर्ता का रिश्तेदार है, उसने मथुरा में जमीन का सौदा होने की बात कहकर याचिकाकर्ता के खाते में नौ लाख रुपए पीडित से जमा कराए और बाद में राशि खुद ले ली। इसके बदले हुए दस हजार रुपए कमीशन दिया गया।
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याचिका में कहा गया कि प्रकरण में उसकी कोई भूमिका नहीं है। पुलिस जानबूझकर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही और न ही कोई राशि बरामद हुई है। जबकि जांच में सामने आ चुका है कि मुख्य आरोपी ने ठगी गई राशि से मकान खरीदा है। इस पर अदालत ने लचर जांच पर नाराजगी जताते हुए पुलिस कमिश्नर को बुधवार को पेश होने के आदेश दिए हैं।