फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Complete the investigation of FIR filed against Vedanta Group in one month-Rajasthan highcourt

वेदांता ग्रुप के खिलाफ दर्ज FIR की एक माह में पूरी करो जांच, हाईकोर्ट के आदेश

Thu, 15 Feb 2018 03:40 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 15 Feb 2018 03:40 PM IST
विज्ञापन
Complete the investigation of FIR filed against Vedanta Group in one month-Rajasthan highcourt
राजस्थान हाईकोर्ट ने रॉक फास्फेट खनन को लेकर वेदांता ग्रुप के खिलाफ दर्ज एफआईआर की एक माह में जांच पूरी करने को कहा है। अदालत ने जांच अधिकारी को 21 मार्च तक पालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन


न्यायाधीश बनवारी लाल शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश अजय कुमार जैन की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान प्रकरण के जांच अधिकारी से अदालत ने पूछा कि एफआईआर दर्ज होने के दो साल तक क्या कार्रवाई की गई? इस पर जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि खान विभाग को पत्र जारी कर रॉक फास्फेट का खनन निजी कंपनी को देने के संबंध में जानकारी मांगी गई है। जांच अधिकारी ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्रकरण में एक माह में जांच पूरी कर ली जाएगी। इस पर अदालत ने 21 मार्च तक जांच पूरी कर अदालत में पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
विज्ञापन

याचिका में कहा, सरकारी कंपनी ही कर सकती है खनन

Complete the investigation of FIR filed against Vedanta Group in one month-Rajasthan highcourt
याचिका में अजय कुमार जैन ने बताया कि रॉक फास्फेट के खनन का काम सरकारी कंपनी ही कर सकती है। वर्ष 2006 तक हिंदुस्तान जिंक ही इसके खनन का काम करती थी। इस दौरान हिंदुस्तान जिंक का वेदांता में विलय हो गया।

वहीं, 2006 में ही सरकार ने खनन लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया। इस पर वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक के नाम पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान 2008 में सरकारी अधिवक्ता ने तत्कालीन खान सचिव अशोक सिंघवी के मौखिक निर्देश पर अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को खनन की अनुमति दी जा रही है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रकरण तय कर दिया।

सीबीआई से जांच की गुहार

Complete the investigation of FIR filed against Vedanta Group in one month-Rajasthan highcourt
याचिका में कहा गया कि मामला खुलने पर मिलीभगत कर हाईकोर्ट के इस आदेश की अपील नहीं करने का निर्णय लिया गया। वहीं, दूसरी तरफ एसीबी को मिली गुप्त सूचना पर वर्ष 2011 में प्राथमिकी दर्ज की गई।

एसीबी ने चार साल जांच के बाद 23 सितंबर 2015 को अशोक सिंघवी और वेदांता के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। याचिका में कहा गया कि वेदांता के अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के दो साल बीतने पर भी कोई जांच नहीं की जा रही।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि खान विभाग ने वर्ष 1984 में आदेश जारी कर रॉक फास्फेट का खनन निजी क्षेत्र के लिए स्वीकृत ना कर सिर्फ राज्य सरकार के स्वामित्व वाली राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड को ही स्वीकृत करने के संबंध में आदेश जारी किए गए।

इसके बावजूद निजी कंपनी वेदांता ग्रुप को रॉक फास्फेट खनन का काम दिया गया और इस संबंध में दर्ज एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में गुहार की गई कि प्रकरण की जांच एसीबी से लेकर सीबीआई को सौंपी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed