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जानिए कैसे मिली इनको 'सीए' में सफलता
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 18 Jul 2017 07:31 PM IST
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परिणामों में सफलता के बाद विद्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
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चार्टड एकाउंटेंट के फाइनल के आज जारी हुए परिणाम में जोधपुर के दो होनहारों ने मैरिट में स्थान हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
सीकर के वैभव लड्ढा ने अखिल भारतीय स्तर पर सातवीं रैंक हासिल कर ज़िले का नाम रोशन किया है। वैभव ने शेखावाटी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह राजकीय स्कूल श्रीमाधोपुर के छात्र रहे केशव अग्रवाल ने हिंदी माध्यम में शेखावाटी में अव्वल मुकाम हासिल किया है। 12 वीं कक्षा वाणिज्य की जिला मेरिट में पहले स्थान पर रहने वाले वाले वैभव ने सीए परीक्षा में 200 में से 185 अंक हासिल किए।
व्यवसायी सुभाष लड्ढा के होनहार बेटे वैभव ने बताया कि उसने नियमित रूप से 10 घंटे अध्ययन किया था। प्रथम प्रयास में सफलता हासिल करने वाले वैभव का कहना है कि कठोर मेहनत और अनुशासन सफलता का मूल मंत्र है। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता के आशीर्वाद और ऐम कोचिंग संचालक अमित मिश्रा, शिक्षक मोनू सर और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है।
इसी तरह राजकीय स्कूल से पढाई करने वाले केशव अग्रवाल हिंदी माध्यम से परीक्षा देकर हिंदी वर्ग में अव्वल रहा है। उसने 200 में से 174 अंक प्राप्त किये है। पशु आहार विक्रेता अशोक अग्रवाल के इस होनहार लाडले ने राजकीय स्कूल श्रीमाधोपुर से अध्ययन करके 84 प्रतिशत अंक हासिल किये है। उसने बताया कि इस सफलता के लिए उसने 5 घंटे नियमित रूप से अध्ययन किया था। केशव ने अपनी सफलता का श्रेय माता- पिता के आशीर्वाद और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। हिंदी माध्यम की किताबों में गलतियों की भरमार का सामना करके सफलता हासिल करने वाले केशव का कहना है कि आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है।
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सीकर के वैभव लड्ढा ने अखिल भारतीय स्तर पर सातवीं रैंक हासिल कर ज़िले का नाम रोशन किया है। वैभव ने शेखावाटी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह राजकीय स्कूल श्रीमाधोपुर के छात्र रहे केशव अग्रवाल ने हिंदी माध्यम में शेखावाटी में अव्वल मुकाम हासिल किया है। 12 वीं कक्षा वाणिज्य की जिला मेरिट में पहले स्थान पर रहने वाले वाले वैभव ने सीए परीक्षा में 200 में से 185 अंक हासिल किए।
व्यवसायी सुभाष लड्ढा के होनहार बेटे वैभव ने बताया कि उसने नियमित रूप से 10 घंटे अध्ययन किया था। प्रथम प्रयास में सफलता हासिल करने वाले वैभव का कहना है कि कठोर मेहनत और अनुशासन सफलता का मूल मंत्र है। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता के आशीर्वाद और ऐम कोचिंग संचालक अमित मिश्रा, शिक्षक मोनू सर और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है।
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इसी तरह राजकीय स्कूल से पढाई करने वाले केशव अग्रवाल हिंदी माध्यम से परीक्षा देकर हिंदी वर्ग में अव्वल रहा है। उसने 200 में से 174 अंक प्राप्त किये है। पशु आहार विक्रेता अशोक अग्रवाल के इस होनहार लाडले ने राजकीय स्कूल श्रीमाधोपुर से अध्ययन करके 84 प्रतिशत अंक हासिल किये है। उसने बताया कि इस सफलता के लिए उसने 5 घंटे नियमित रूप से अध्ययन किया था। केशव ने अपनी सफलता का श्रेय माता- पिता के आशीर्वाद और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। हिंदी माध्यम की किताबों में गलतियों की भरमार का सामना करके सफलता हासिल करने वाले केशव का कहना है कि आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है।
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माता पिता को दिया सफलता का श्रेय
सफलता का जश्न मनाते हुए स्टू़डेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
जोधपुर के रहने वाले रिषभ राठी ने परीक्षा में देशभर में 14 वीं रैक हासिल की। वहीं जोधपुर की ही प्रियंका है 36 वीं रैक हासिल की है। होनहारों के रैंक हासिल करने के बाद से ही उनके घर और सीए इंस्टीट्यूट में खुशी का माहौल है।
मीडिया से बात करते हुए रिषभ राठी ने कहा कि पहली बार में उन्होंने 14 वीं रैंक हासिल की है। नियमित अध्ययन से उन्हें यह सफलता मिली है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को दिया। साथ ही सीए में कैरियर बनाने के लिए उसने कॉरपोरेट में काम करने की बात कही। उन्होंने अपने जैसे युवाओं को निराश नहीं होने और नियमित अपनी पढाई पर ध्यान देने की बात कही।
इधर, देशभर में 36 रैंक हासिल करने वाली प्रियंका का कहना है कि वह फिलहाल जॉब को प्राथमिकता देगी। इसके साथ ही उसे सिविल सर्विसेज आईएएस की तैयार करने की बात कही। उसने कहा कि उसका और परिजनों का सपना है कि वह आईएएस बने। अब इसके लिए वह मेहनत करेगी। इसमें भी उसे सफलता मिलेगी। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को दिया।
मीडिया से बात करते हुए रिषभ राठी ने कहा कि पहली बार में उन्होंने 14 वीं रैंक हासिल की है। नियमित अध्ययन से उन्हें यह सफलता मिली है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को दिया। साथ ही सीए में कैरियर बनाने के लिए उसने कॉरपोरेट में काम करने की बात कही। उन्होंने अपने जैसे युवाओं को निराश नहीं होने और नियमित अपनी पढाई पर ध्यान देने की बात कही।
इधर, देशभर में 36 रैंक हासिल करने वाली प्रियंका का कहना है कि वह फिलहाल जॉब को प्राथमिकता देगी। इसके साथ ही उसे सिविल सर्विसेज आईएएस की तैयार करने की बात कही। उसने कहा कि उसका और परिजनों का सपना है कि वह आईएएस बने। अब इसके लिए वह मेहनत करेगी। इसमें भी उसे सफलता मिलेगी। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को दिया।