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बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामला : विधायक पुत्र और वकील का आचरण कोर्ट की अवमानना
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 18 May 2017 07:22 PM IST
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जयपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-5 ने बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में आरोपित विधायक पुत्र सिद्धार्थ महरिया और उसके वकील गोरधनसिंह का आचरण न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में माना है।
अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ उचित समय पर विधि अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई 29 मई तक टाल दी है। अदालत ने यह आदेश पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल व अन्य की ओर से दायर रिवीजन अर्जी में सिद्धार्थ महरिया की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि महरिया की ओर से पेश प्रार्थना पत्र के तथ्य न्यायालय की अवमानना के बराबर है। इसके अलावा वकील गोरधनसिंह ने इन तथ्यों को अदालत में दोहराया और पीठासीन अधिकारी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। जिसके चलते न्यायिक कार्रवाई में विघ्न पैदा हुआ।
मामले के अनुसार सिद्धार्थ महरिया की ओर से पेश परिवाद पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने गत दिनों पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया था। इस आदेश को एडीजे क्रम-15 में चुनौती दी गई। निचली अदालत के आदेश पर स्टे पर सुनवाई के दौरान महरिया की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया गया। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि प्रकरण में पीठासीन अधिकारी आरोपी पुलिस का पक्ष ले रहे हैं। ऐसे में उन्हें बर्खास्त कराने के लिए महरिया की ओर से मुख्य न्यायाधीश और सतर्कता रजिस्ट्रार को शिकायत भेजी गई है।
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इसके अलावा डीजे कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की गुहार की गई है। इसलिए अदालत प्रकरण में सुनवाई ना करे। जिसका विरोध करते हुए रिवीजनकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रार्थना पत्र अवमानना की श्रेणी में आता है। ऐसे में महरिया और उसके वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की जाए। महरिया की ओर से अदालत पर दबाव बनाने के लिए यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया है।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि प्रार्थना पत्र पेश करने वाले महरिया और तथ्यों को अदालत में दोहराने वाले वकील गोरधनसिंह का आचरण अवमानना की श्रेणी में आता है। ऐसे में दोनों के खिलाफ उचित स्तर पर विधि अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ उचित समय पर विधि अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई 29 मई तक टाल दी है। अदालत ने यह आदेश पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल व अन्य की ओर से दायर रिवीजन अर्जी में सिद्धार्थ महरिया की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि महरिया की ओर से पेश प्रार्थना पत्र के तथ्य न्यायालय की अवमानना के बराबर है। इसके अलावा वकील गोरधनसिंह ने इन तथ्यों को अदालत में दोहराया और पीठासीन अधिकारी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। जिसके चलते न्यायिक कार्रवाई में विघ्न पैदा हुआ।
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मामले के अनुसार सिद्धार्थ महरिया की ओर से पेश परिवाद पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने गत दिनों पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया था। इस आदेश को एडीजे क्रम-15 में चुनौती दी गई। निचली अदालत के आदेश पर स्टे पर सुनवाई के दौरान महरिया की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया गया। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि प्रकरण में पीठासीन अधिकारी आरोपी पुलिस का पक्ष ले रहे हैं। ऐसे में उन्हें बर्खास्त कराने के लिए महरिया की ओर से मुख्य न्यायाधीश और सतर्कता रजिस्ट्रार को शिकायत भेजी गई है।
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इसके अलावा डीजे कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की गुहार की गई है। इसलिए अदालत प्रकरण में सुनवाई ना करे। जिसका विरोध करते हुए रिवीजनकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रार्थना पत्र अवमानना की श्रेणी में आता है। ऐसे में महरिया और उसके वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की जाए। महरिया की ओर से अदालत पर दबाव बनाने के लिए यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया है।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि प्रार्थना पत्र पेश करने वाले महरिया और तथ्यों को अदालत में दोहराने वाले वकील गोरधनसिंह का आचरण अवमानना की श्रेणी में आता है। ऐसे में दोनों के खिलाफ उचित स्तर पर विधि अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।