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363 दीप जलाकर नववर्ष का आगाज, साथ में इन्हें दी श्रद्धांजलि
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 31 Dec 2017 04:24 PM IST
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363 बलिदानियों के लिए विधानसभा के सामने डाला गया 5 दिवसीय पड़ाव
- फोटो : Amar Ujala
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खेजड़ली में सन 1730 में खेजड़ी के पेड़ बचाने के अपना सिर कटाने वालों को विश्नोई समाज की ओर से आज अनोखे ढंग से श्रद्धांजलि दी गई।
विश्नोई समाज से जुड़े संगठन की ओर से सर्व समाज के बैनर तले आज से जयपुर में विधानसभा के सामने पांच दिवसीय पड़ाव शुरू किया गया। पड़ाव का नेतृत्व कर रहे विश्नोई समाज के विषेक विश्नोई ने बताया कि आज पर्यावरण यज्ञ के साथ 363 दीप जलाकर बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि दी गई।
उन्होनें कहा जहां आज के दौर में लोग नव वर्ष का स्वागत आतिशबाजी से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए करते हैं वहीं हमारा संगठन ग्लोबल ब्रांड 363 पौराणिक रीति रिवाज से दीप जलाकर नए साल का स्वागत करेगा।
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विश्नोई समाज से जुड़े संगठन की ओर से सर्व समाज के बैनर तले आज से जयपुर में विधानसभा के सामने पांच दिवसीय पड़ाव शुरू किया गया। पड़ाव का नेतृत्व कर रहे विश्नोई समाज के विषेक विश्नोई ने बताया कि आज पर्यावरण यज्ञ के साथ 363 दीप जलाकर बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि दी गई।
उन्होनें कहा जहां आज के दौर में लोग नव वर्ष का स्वागत आतिशबाजी से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए करते हैं वहीं हमारा संगठन ग्लोबल ब्रांड 363 पौराणिक रीति रिवाज से दीप जलाकर नए साल का स्वागत करेगा।
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क्या हुआ था सन 1730 में
पड़ाव डाले सर्व समाज के युवा
- फोटो : Amar Ujala
आपको बता दें कि सन 1730 में जोधपुर के खेजड़ली गांव में अमृता देवी के नेतृत्व में पेड़ों को कटने से बचाने के लिए 363 लोगों ने कुल्हाड़ी से सिर कटवाते हुए बलिदान दिया था। संस्था के लोगों का कहना है कि देश में पर्यावरण को लेकर इतनी बड़ी कुर्बानी आज तक किसी ने नहीं दी है ऐसे में आज के दौर में लोगों को ऐसी घटना याद दिलाना बेहद जरुरी है।
ग्लोबल ब्रांड 363 ने सरकार के आगे 5 सूत्रीय मांगे रखी है जिनमें मुख्य मांग है कि जिन 363 लोगों ने पेड़ों के लिए अपनी जान को कुर्बान कर दिया था उन्हें पर्यावरण शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए और साथ ही साथ भारतीय संसद में उन्हें हर बार श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए।
ग्लोबल ब्रांड 363 ने सरकार के आगे 5 सूत्रीय मांगे रखी है जिनमें मुख्य मांग है कि जिन 363 लोगों ने पेड़ों के लिए अपनी जान को कुर्बान कर दिया था उन्हें पर्यावरण शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए और साथ ही साथ भारतीय संसद में उन्हें हर बार श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए।