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ये एप सैकंड्स में बताएगा अपनों को कि आप हैं परेशानी में
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 16 Nov 2017 06:14 PM IST
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अगर आप किसी भी तरह के संकट में हैं, तो आप क्या करेंगे? अपनों को फोन मिलाएंगे। यदि एक्सीडेंट जैसा मामला है या घर में बुजुर्ग पैनिक में हैं तो वे फोन मिलाएंगे, लेकिन आपने फोन नहीं उठाया तो कुछ भी हो सकता है। अपनों के पास तुरंत सूचना पहुंचाने की चुनौती ही सबसे बड़ी बाधा बनकर आ सकती है।
ऐसे में अब एक ऐसी तकनीक का एप आ गया है जो हर तरह की परिस्थिति में अपनों तक सूचना शेयर कर सकता है। ये है मेरा पेशेंट एप। जयपुर निवासी मनीष मेहता और आलोक खण्डेलवाल ने यह नया आइडिया डवलप किया है, जो तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस एप जरिए एक साथ पांच लोगों को पैनिक अलार्म जाएगा। इसके साथ गूगल लोकेशन भी हर स्थिति में पहुंचेगी। यानी आपका फोन साइलेंट मोड पर है तो भी अलार्म के साथ लोकेशन पहुंचती है और, स्विच्ड ऑफ है तो ऑन करते ही। यही नहीं, यदि सभी मोबाइल में इंटरनेट नहीं है तो भी जीपीएस लोकेशन एसएमएस के साथ पहुंच जाएगी।
मनीष और आलोक का दावा है कि एप में यह एक यूनीक फीचर है, जो दुनिया में अकेला है, जो पैनिक होने पर एक साथ ऐसे फीचर लेकर आया है। इस एप के जरिए देशभर में एक्सीडेंट से हो रही मौतों की संख्या में तेजी से कमी लाई जा सकेगी।
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एक्सीडेंट के बाद समय पर रेस्क्यू मिल जाए तो 70 फीसदी मौतों में कमी लाई जा सकती है। यदि कोई भी व्यक्ति इस तकनीक से तैयार मॉडर का उपयाग अपने मोबाइल में करता है, तो वह न केवल खुद को मुसीबत से निकालने में सक्षम हो सकता है, बल्कि औरों की जान भी बचा सकता है।
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ऐसे में अब एक ऐसी तकनीक का एप आ गया है जो हर तरह की परिस्थिति में अपनों तक सूचना शेयर कर सकता है। ये है मेरा पेशेंट एप। जयपुर निवासी मनीष मेहता और आलोक खण्डेलवाल ने यह नया आइडिया डवलप किया है, जो तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस एप जरिए एक साथ पांच लोगों को पैनिक अलार्म जाएगा। इसके साथ गूगल लोकेशन भी हर स्थिति में पहुंचेगी। यानी आपका फोन साइलेंट मोड पर है तो भी अलार्म के साथ लोकेशन पहुंचती है और, स्विच्ड ऑफ है तो ऑन करते ही। यही नहीं, यदि सभी मोबाइल में इंटरनेट नहीं है तो भी जीपीएस लोकेशन एसएमएस के साथ पहुंच जाएगी।
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मनीष और आलोक का दावा है कि एप में यह एक यूनीक फीचर है, जो दुनिया में अकेला है, जो पैनिक होने पर एक साथ ऐसे फीचर लेकर आया है। इस एप के जरिए देशभर में एक्सीडेंट से हो रही मौतों की संख्या में तेजी से कमी लाई जा सकेगी।
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एक्सीडेंट के बाद समय पर रेस्क्यू मिल जाए तो 70 फीसदी मौतों में कमी लाई जा सकती है। यदि कोई भी व्यक्ति इस तकनीक से तैयार मॉडर का उपयाग अपने मोबाइल में करता है, तो वह न केवल खुद को मुसीबत से निकालने में सक्षम हो सकता है, बल्कि औरों की जान भी बचा सकता है।