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अजमेर ब्लास्ट: 2007 से अब तक ये रहे महत्वपूर्ण
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 23 Mar 2017 02:51 PM IST
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अजमेर दरगाह
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अजमेर बम ब्लास्ट तब खासा चर्चा में आ गया था जब हिन्दूवादी संगठनों के नाम इससे जुड़े थे। उस समय देश में धर्म से आतंकवाद को जोड़कर पुकारा जा रहा था। एक ओर इस्लामिक आतंकवाद की चर्चा हो रही थी, तो दूसरी ओर हिन्दुवाद को या भगवा को आतंकवाद से जोड़कर देखा जा रहा था। इस बीच वर्ष 2007 में अजमेर दरगाह में हुए बम ब्लास्ट ने धर्म से आतंकवाद को जोड़ने वाले जुमलों को और हवा दे दी।
- अजमेर की ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 11 अक्टूबर 2007 को आहता—ए—नूर परिसर में प्रेशर कूकर बम से ब्लास्ट हुआ था।
- शाम 6 बजकर 14 मिनट पर हुए इस ब्लास्ट में करीब 3 जायरीनों की मौत हुई थी, जबकि 15 जायरीन घायल हुए थे।
- विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान लावारिस बैग मिला था जिसमें टाइमर लगा हुआ जिंदा बम मिला था।
- मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को सौंपी गई, जिसके बाद कुल 13 लोगों को मामले में दोषी पाया गया था। इन 13 आरोपियों में से 8 आरोपी तो 2010 से ही न्यायिक हिरासत में थे।
- आठों आरोपियों में स्वामी असीमानंद, हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार, भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता शामिल हैं।
- एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे को जमानत पर छोड़ दिया गया था।
- मामले में एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की साल 2007 में हत्या कर दी गई थी, वहीं तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर अब तक फरार चल रहे हैं।
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- मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार ने मई 2010 में मामले की पूरी जांच राजस्थान पुलिस की एटीएस शाखा को सौंपी थी, जिसके बाद एक अप्रैल 2011 को भारत सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौप दी थी।
- 8 मार्च, 2017 को एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने स्वामी असीमानन्द व अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और आरोपी देवेंद्र व भावेश की सजा सुनाने को लेकर अगली तारीख दी।
- 22 मार्च, 2017 को भावेश और देवेंद्र को उम्र कैद की सजा सुनाई।
क्यों रची थी साजिश
- पुलिस के अनुसार इस घटना के बाद हमले का मास्टरमाइंड बरी किए गए आरोपी स्वामी असीमानंद को ठहराया गया था, जिसे सीबीआई ने उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया था।
- जांच एजेंसियों के अनुसार असीमानंद ने दिल्ली की अदालत में इस बात को कबूल किया था कि बनारस के संकटमोचन मंदिर और गुजरात में अक्षरधाम मंदिर पर हुए हमलों ने उन्हें बम के बदले बम की योजना बनाने के लिए उकसाया।
- बताया जा रहा है कि असीमानंद ने अदालत से कहा था कि हिंदू जायरीनों को दरगाह में जाने से रोकने के लिए उन्होनें ये सारा षडयंत्र रचा था।
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- अजमेर की ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 11 अक्टूबर 2007 को आहता—ए—नूर परिसर में प्रेशर कूकर बम से ब्लास्ट हुआ था।
- शाम 6 बजकर 14 मिनट पर हुए इस ब्लास्ट में करीब 3 जायरीनों की मौत हुई थी, जबकि 15 जायरीन घायल हुए थे।
- विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान लावारिस बैग मिला था जिसमें टाइमर लगा हुआ जिंदा बम मिला था।
- मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को सौंपी गई, जिसके बाद कुल 13 लोगों को मामले में दोषी पाया गया था। इन 13 आरोपियों में से 8 आरोपी तो 2010 से ही न्यायिक हिरासत में थे।
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- आठों आरोपियों में स्वामी असीमानंद, हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार, भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता शामिल हैं।
- एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे को जमानत पर छोड़ दिया गया था।
- मामले में एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की साल 2007 में हत्या कर दी गई थी, वहीं तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर अब तक फरार चल रहे हैं।
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- मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार ने मई 2010 में मामले की पूरी जांच राजस्थान पुलिस की एटीएस शाखा को सौंपी थी, जिसके बाद एक अप्रैल 2011 को भारत सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौप दी थी।
- 8 मार्च, 2017 को एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने स्वामी असीमानन्द व अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और आरोपी देवेंद्र व भावेश की सजा सुनाने को लेकर अगली तारीख दी।
- 22 मार्च, 2017 को भावेश और देवेंद्र को उम्र कैद की सजा सुनाई।
क्यों रची थी साजिश
- पुलिस के अनुसार इस घटना के बाद हमले का मास्टरमाइंड बरी किए गए आरोपी स्वामी असीमानंद को ठहराया गया था, जिसे सीबीआई ने उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया था।
- जांच एजेंसियों के अनुसार असीमानंद ने दिल्ली की अदालत में इस बात को कबूल किया था कि बनारस के संकटमोचन मंदिर और गुजरात में अक्षरधाम मंदिर पर हुए हमलों ने उन्हें बम के बदले बम की योजना बनाने के लिए उकसाया।
- बताया जा रहा है कि असीमानंद ने अदालत से कहा था कि हिंदू जायरीनों को दरगाह में जाने से रोकने के लिए उन्होनें ये सारा षडयंत्र रचा था।