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आठवीं के छात्र ने पशु-पक्षियों के लिए बनाई एप और जीत लिया यूएस से ये खिताब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 02 Nov 2017 06:32 PM IST
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अश्निध खण्डेलवाल
- फोटो : अमर उजाला
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13 साल के एक छात्र की एप ने जहां अमेरिका में लोगों को प्रभावित किया, वहीं अपनी अलग कैटेगिरी में एक पुरस्कार भी हासिल किया।
जयपुर के छात्र अश्निध खण्डेलवाल के एप ‘रेस्क्यू एनिमल हेल्पलाइन’ को अमरीका के श्रेष्ठ तकनीकी संस्थान मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ने ‘मोस्ट इनोवेटिव एप’ श्रेणी का विजेता घोषित किया है। इस एप के लिए तेरह वर्षीय अश्निध को अक्टूबर माह का यूथ विनर घोषित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस एप के माध्यम से दुनिया में किसी भी जगह पर संकट में फंसे जीव या पक्षी को एक टैप के माध्यम से सबसे नजदीकी रेस्क्यू सेंटर तक पहुंचाया जा सकता है। इस एप को ‘मोस्ट इनोवेटिव एप’ श्रेणी का विजेता घोषित करते हुए एमआईटी ने लिखा कि कोडिंग पसंद करने वाले भारतीय विद्यार्थी अश्निध का यह एप एनिमल रेस्क्यू सेंटर की पहचान करता है और वहां का संपर्क सूत्र उपयोगकर्ता को देता है।
उपयोगकर्ता रेस्क्यू सेंटर को सीधे ही कॉल कर सकते हैं या फिर एक टैप के माध्यम से गूगल मैप पर वहां तक पहुंचने का रास्ता देख सकते हैं।
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जयपुर के छात्र अश्निध खण्डेलवाल के एप ‘रेस्क्यू एनिमल हेल्पलाइन’ को अमरीका के श्रेष्ठ तकनीकी संस्थान मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ने ‘मोस्ट इनोवेटिव एप’ श्रेणी का विजेता घोषित किया है। इस एप के लिए तेरह वर्षीय अश्निध को अक्टूबर माह का यूथ विनर घोषित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस एप के माध्यम से दुनिया में किसी भी जगह पर संकट में फंसे जीव या पक्षी को एक टैप के माध्यम से सबसे नजदीकी रेस्क्यू सेंटर तक पहुंचाया जा सकता है। इस एप को ‘मोस्ट इनोवेटिव एप’ श्रेणी का विजेता घोषित करते हुए एमआईटी ने लिखा कि कोडिंग पसंद करने वाले भारतीय विद्यार्थी अश्निध का यह एप एनिमल रेस्क्यू सेंटर की पहचान करता है और वहां का संपर्क सूत्र उपयोगकर्ता को देता है।
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उपयोगकर्ता रेस्क्यू सेंटर को सीधे ही कॉल कर सकते हैं या फिर एक टैप के माध्यम से गूगल मैप पर वहां तक पहुंचने का रास्ता देख सकते हैं।
जोड़ा है देश के कुछ शहरों को
demo pic
- फोटो : डेमो पिक
भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम, प्रताप नगर में आठवीं कक्षा के छात्र अश्निध खण्डेलवाल ने बताया कि उन्होंने इसे एप इन्वेंटर पर एंड्रॉइड फोन के लिए तैयार किया है। फिलहाल उन्होंने इस एप में भारत के कुछ शहरों को जोड़ा है और शीघ्र ही इसमें दुनियाभर के सभी प्रमुख शहर जोड़े जाएंगे। इसके बाद इसे गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्च किया जाएगा।
अश्निध बताते हैं कि उन्हें कोडिंग से शुरू से ही लगाव है। वे इन दिनों एक ऐसे एप पर काम कर रहे हैं, जो सभी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों की मदद करेगा। इस एप के माध्यम से वे आसानी से एक टैप से नजदीकी अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन, एनिमल रेस्क्यू सेंटर, बैंक, एटीएम आदि को लोकेट कर सकेंगे या सीधे ही उनसे फोन पर बात कर सकेंगे। वे इस उपलब्धि का श्रेय विद्यालय की प्राचार्या प्रियदर्शिनी कच्छावाहा को देते हैं, जो हमेशा उन्हें नवाचार की प्रेरणा देती हैं।
अश्निध बताते हैं कि उन्हें कोडिंग से शुरू से ही लगाव है। वे इन दिनों एक ऐसे एप पर काम कर रहे हैं, जो सभी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों की मदद करेगा। इस एप के माध्यम से वे आसानी से एक टैप से नजदीकी अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन, एनिमल रेस्क्यू सेंटर, बैंक, एटीएम आदि को लोकेट कर सकेंगे या सीधे ही उनसे फोन पर बात कर सकेंगे। वे इस उपलब्धि का श्रेय विद्यालय की प्राचार्या प्रियदर्शिनी कच्छावाहा को देते हैं, जो हमेशा उन्हें नवाचार की प्रेरणा देती हैं।