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चिंताजनक: अफगानिस्तान युद्ध नहीं, मौत का मैदान, गोली और बम से ज्यादा भूख बनी जानलेवा 

Fri, 20 Aug 2021 08:25 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 20 Aug 2021 08:25 AM IST
सार

  • अमेरिकी सेना ने सबसे अधिक ड्रोन हमले करने के साथ-साथ आमने-सामने की लड़ाई लड़ी
  • ब्राउन यूनिवर्सिटी का कॉस्ट्स ऑफ वॉर रिपोर्ट में दावा, दो दशक में अब तक 2.41 लाख लोगों ने गंवाई जान

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Worrying: Afghanistan is not a war it is death ground, more peoples hunger than bullets and bombs
अमेरिकी सेना की आर्मड गाड़ियां - फोटो : social media

विस्तार

अफगानिस्तान को पिछले दो दशक से तालिबान मुक्त बनाने की लड़ाई में 2.41 लाख जानें जा चुकी हैं। अब फिर हालात वैसे ही बन गए हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अफगानिस्तान युद्ध का नहीं, मौत का मैदान बन गया है। 

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ब्राउन यूनिवर्सिटी का कॉस्ट्स ऑफ वॉर रिपोर्ट में दावा, दो दशक में 2.41 लाख लोगों ने गंवाई जान 
अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी की ताजा रिपोर्ट कॉस्ट्स ऑफ वार (युद्ध की कीमत) शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहाड़ी क्षेत्र में 2,670 किलोमीटर की सीमा है। जहां अमेरिकी सेना ने सबसे अधिक ड्रोन हमले करने के साथ-साथ आमने-सामने की लड़ाई लड़ी है।
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इस लड़ाई में अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा के बीच 71,344 स्थानीय लोगों की मौत हुई है। इसमें से 47,245 स्थानीय लोगों की मौत अफगानिस्तान में जबकि 24,099 लोगों की मौत पाकिस्तान में हुई है।
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युद्ध का मैदान बने अफगानिस्तान में अक्तूबर 2001 से अप्रैल के बीच लोग गोली और बम से ही नहीं भुखमरी, बीमारी और चोट लगने के बाद समय पर इलाज न मिलने से भी मरे हैं।

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