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विश्व साक्षरता दिवस: आजादी के बाद 57 फीसदी बढ़ा साक्षरता ग्राफ, वैश्विक स्तर पर फिर भी पिछड़ा भारत

Sat, 08 Sep 2018 02:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Sep 2018 02:00 PM IST
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World literacy day: literacy graph increased by 57 percent after Independence

आज 52वां विश्व साक्षरता दिवस है। यह दिन 1966 से हर साल 8 सितंबर को मनाया जाता है। पूरा विश्व व्यक्ति, समाज और समुदाय का ध्यान साक्षरता के महत्व की ओर लाने के लिए इस दिन को मनाता है। यूनेस्को ने 7 नवंबर साल 1965 को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला किया था। इसी के तहत यूनेस्को ने ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट भी जारी की है।

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इस रिपोर्ट में भारत के बारे में कहा गया है कि यहां आजादी के बाद साक्षरता का ग्राफ 57 फीसदी तक बढ़ा है, बावजूद इसके भारत वैश्विक स्तर पर पिछड़ा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत साल 2050 में प्राइमरी शिक्षा, 2060 में माध्यमिक शिक्षा और 2085 में उच्च माध्यमिक शिक्षा का वैश्विक लक्ष्य हासिल कर लेगा।
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6.07 करोड़ बच्चे आज भी हैं स्कूली शिक्षा से महरूम

रिपोर्ट के मुताबिक आज भी दुनियाभर के करीब 6.07 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा पाने में असमर्थ हैं। दुनियाभर के 78 करोड़ लोग आज भी लिख और पढ़ नहीं सकते। वहीं माली, नाइजीरिया और बुरकिना ऐसे देश हैं जहां सबसे कम साक्षरता दर है।

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भारत में परेशान करने वाले हैं आंकड़े

World literacy day: literacy graph increased by 57 percent after Independence

भारत में आजादी के बाद से साक्षरता दर में बढ़ोतरी हुई है लेकिन फिर भी आंकड़े परेशान करने वाले हैं। रिपोर्ट में मिली जानकारी से पता चलता है कि भारत की साक्षरता दर विश्व की साक्षरता दर से 84 फीसदी कम है। देश में चलाए जा रहे सर्व शिक्षा अभियान जैसे कार्यक्रमों के तहत सरकार भी काफी कदम उठा रही है। आंकड़ों के मुताबिक आजादी के समय 1947 में साक्षरता दर महज 18 फीसदी थी जो कि साल 2011 में बढ़कर 75.06 तक पहुंच गई।

शिक्षा के क्षेत्र में भी लैंगिक असमानता

देश में महिलाओं और पुरुषों के बीच सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में भेदभाव किया जाता रहा है लेकिन आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में भी भेदभाव का सामना करती हैं। देश में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक साक्षर हैं। पुरुषों की साक्षरता दर 82.14 फीसदी है। वहीं महिलाओं की साक्षरता दर 65.46 फीसदी है। अगर पड़ोसी देशों की बात करें तो उनमें भारत की स्थिति सबसे बेहतर है। वहीं विकसित देशों के मुकाबले भारत एक पिछड़ा देश ही है।

राज्यों में बिहार सबसे पीछे और सबसे आगे केरल

साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 6 लाख स्कूल ऐसे हैं जहां कमरों की कमी है। वहीं इस मामले में अगर राज्यों की बात करें तो उनमें पहला स्थान केरल का है। जबकि सबसे पिछड़ा राज्य बिहार है। केरल में साक्षरता दर 93.91 फीसदी है, लक्ष्यद्वीप में 92.28 फीसदी, मिजोरम में 91.58 फीसदी, त्रिपुरा में 87.75 फीसदी, गोवा में 87.40 फीसदी है। जबकि इनमें से सबसे पिछड़े राज्य तेलंगाना और बिहार हैं। तेलंगाना में साक्षरता दर 66.50 फीसदी है और बिहार में 63.82 फीसदी है।

युवाओं के पास डिग्री तो है मगर कौशल नहीं

World literacy day: literacy graph increased by 57 percent after Independence

विश्व साक्षरता दिवस के मौके पर भारत में इस बार थीम साक्षरता और कौशल विकास रखी गई है। इसी के तहत आई इंडिया स्किल्स रिपोर्ट, 2018 में बताया गया है कि बीते पांच सालों में भारतीय सनातकों की रोजगार क्षमता 34 फीसदी से बढ़कर 45.6 फीसदी पर पहुंच गई है।

यह आंकड़ा बेशक अच्छा दिख रहा है लेकिन यह भी सच है कि देश में अभी भी युवाओं की बड़ी संख्या बेरोजगार है। उनके पास बड़ी से बड़ी डिग्री तो है लेकिन पर्याप्त कौशल नहीं है। वहीं नार्वे, फिनलैंड, एंडोरा, लग्जमबर्ग और ग्रीनलैंड जैसे देशों में साक्षरता दर पूरे सौ फीसदी है।

सबसे ज्यादा अनपढ़ हैं भारत में

यूनेस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 78 करोड़ लोग अनपढ़ हैं। इनमें से 75 फीसदी केवल 10 देशों से ही हैं। इन देशों में चीन, भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इथियोपिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और कांगो का नाम शामिल है।

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