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WMO Report: डब्ल्यूएमओ की इस रिपोर्ट से बढ़ सकती है पूरी दुनिया की चिंता, बीते आठ साल सबसे गर्म
Sun, 06 Nov 2022 07:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 06 Nov 2022 07:48 PM IST
सार
यूएनएफसीसीसी के सदस्यों के 27वें सम्मेलन में जारी 'डब्ल्यूएमओ प्रोविजनल स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2022' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर 1993 के बाद से दोगुनी हो गई है। समुद्र के स्तर में वृद्धि जनवरी 2020 से लगभग 10 मिमी बढ़कर इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है।
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यूरोप में भीषण गर्मी
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
इस समय पूरी दुनिया क्लाइमेट चेंज को लेकर परेशान है। इस साल जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर देखा गया है। दुनियाभर के तमाम मौसम विज्ञानी इसे लेकर बार बार आगाह कर रहे हैं। इनका कहना है कि यह स्थिति बेहद खराब है। इस साल दुनियाभर में रिकार्ड गर्मी दर्ज की गई है। इस बीच, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organisation) की एक रिपोर्ट ने दुनियाभर को और ज्यादा चिंता में डाल दिया है। WMO ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि बीते आठ साल इतिहास के सबसे गर्म साल होने का रिकार्ड बनाने वाले हैं।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा कि 2022 में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक (1850-1900) औसत से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है, जो 2015 के आठ वर्षों को रिकॉर्ड में सबसे गर्म बना देगा।
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रविवार को यूएनएफसीसीसी के सदस्यों के 27वें सम्मेलन में जारी 'डब्ल्यूएमओ प्रोविजनल स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2022' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर 1993 के बाद से दोगुनी हो गई है। समुद्र के स्तर में वृद्धि जनवरी 2020 से लगभग 10 मिमी बढ़कर इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 30 साल पहले उपग्रह माप शुरू होने के बाद से पिछले ढाई साल में समुद्र के स्तर में कुल वृद्धि का 10 प्रतिशत हिस्सा है।
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गौरतलब है कि 2022 की प्रोविजनल रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए आंकड़े इस साल सितंबर के आखिरी तक के हैं। इस रिपोर्ट का अंतिम संस्करण अगले अप्रैल में जारी किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में अब तक का वैश्विक औसत तापमान 1850-1900 औसत से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। यदि मौजूदा स्थितियां इस साल के अंत तक जारी रहती है, तो 1850 के बाद 2022 को रिकॉर्ड पर पांचवें या छठे सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया जाएगा। डब्लूएमओ ने कहा कि लगातार दूसरे वर्ष वैश्विक तापमान को कम रखने के बावजूद 2022 अभी भी रिकॉर्ड पर पांचवां या छठा सबसे गर्म वर्ष होने की संभावना है।
इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) छठी आकलन रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2013-2022 की अवधि के लिए 10 साल का औसत पूर्व-औद्योगिक आधार रेखा से 1.14 डिग्री सेल्सियस अधिक होने का अनुमान है। वहीं, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान में प्री-मानसून की अवधि असाधारण रूप से गर्म थी।
डब्ल्यूएमओ के महासचिव प्रोफेसर पेटेरी तालास ने इस स्थिति पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी जितनी ज्यादा गर्म होगी इसका प्रभाव उतना ही ज्यादा बुरा होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास अब वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का इतना उच्च स्तर है कि पेरिस समझौते में तय किया गया कार्बन उत्सर्जन का 1.5 डिग्री सेल्सियस मुश्किल से ही हासिल किया जा सकता है।