UP Congress: यूपी कांग्रेस की बैठकों से क्यों गायब रहते हैं पदाधिकारी, सबसे बड़े राज्य में कैसे मिलेगी मजबूती
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विस्तार
एक तरफ विपक्षी एकता की कोशिशों में कांग्रेस बेहद सक्रिय है, विपक्षी दलों की बेंगलुरु बैठक में ज्यादा से ज्यादा पार्टियों को साथ जोड़ने में कामयाब हो रही है, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में पार्टी के भीतर ही कई अंतर्विरोध नज़र आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बृजलाल खाबरी ने रविवार को पार्टी के सभी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी। बैठक में पार्टी संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की चर्चा की जानी थी। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई इस बैठक में कई शीर्ष पदाधिकारी शामिल ही नहीं हुए। पार्टी के छह उपाध्यक्षों में से केवल एक बैठक में शामिल हुआ, तो छह प्रांतीय अध्यक्षों में तीन अनिल यादव, योगेश दीक्षित और अजय राय बैठक में शामिल नहीं हुए। अजय राय और योगेश दीक्षित को यूपी कांग्रेस के महत्त्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता है।
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शीर्ष विभागों के पदाधिकारी रहे गायब
पार्टी सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, इस महत्त्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के 31 महासचिवों में केवल पांच ही शामिल हुए। कई महासचिवों ने इस तरह की किसी बैठक के होने की जानकारी तक से इनकार कर दिया। बैठक में फ़्रंटल और विभागों के पदाधिकारी भी नदारद रहे। यूथ कांग्रेस के दोनों अध्यक्ष भी बैठक में दिखाई नहीं पड़े। एनएसयूआई के तीन अध्यक्षों में केवल अनस रहमान ही बैठक का हिस्सा रहे। महिला कांग्रेस की पदाधिकारी भी बैठक से ग़ायब थीं। जानकारी के अनुसार ओबीसी और अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्षों ने केवल अपनी बात रखकर ही बैठक से किनारा कर लिया।
स्थिति यह रही कि प्रदेश अध्यक्ष के करीबी लोगों ने सामान्य कार्यकर्ताओं को बैठक में लाकर बैठक की रस्म अदायगी पूरी की। लेकिन शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक से दूरी पूरे दिन कांग्रेस नेताओं के बीच चर्चा का केंद्र बनी रही। चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी की प्रशासनिक-सांगठनिक अनुभवहीनता संगठन पर भारी पड़ रही है। वे सभी लोगों को अपने साथ जोड़कर संगठन को आगे बढ़ाने में असफल साबित हो रहे हैं।
क्यों हो रही यह हालत
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बहुजन समाज पार्टी से आए बृजलाल खाबरी अभी भी कांग्रेस की कार्य संस्कृति से तालमेल नहीं बिठा पाए हैं। पार्टी कार्यकर्ता भी बाहर से आए व्यक्ति को अपने नेता के तौर पर देखने में असहज महसूस कर रहे हैं। बृजलाल खाबरी ने पिछले दिनों जौनपुर और आजमगढ़ में कार्यक्रम आयोजित किए थे। इन जिलों के अध्यक्षों तक को इन कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दी गई। जबकि कांग्रेस की कार्य संस्कृति में किसी भी जिले में कार्यक्रम करने के पहले स्थानीय नेताओं को न केवल सूचित किया जाता है, बल्कि उन्हीं के सहारे कार्यक्रम को सफल बनाने और पार्टी के संदेशों को निचले स्तर तक पहुंचाने का काम किया जाता है। अपने ही जिलाध्यक्षों से तालमेल बिठाने में नाकाम खाबरी केंद्रीय नेतृत्व के संदेशों को निचले स्तर तक पहुंचाने में असफल साबित हो रहे हैं।
दिल्ली तलब हुए, लेकिन कुर्सी बच गई
पिछले दिनों सरकार के विरुद्ध एक प्रदर्शन के दौरान अपने ही पार्टी के एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने के कारण खाबरी की शिकायत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक से हो गई थी। पिछले दिनों पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को संज्ञान में लिए बिना उन्होंने झांसी और जौनपुर में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी थी। इस मामले में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली तलब कर लिया था। हालांकि, केंद्रीय स्तर पर बढ़ी राजनीतिक हलचल के बीच यूपी में कोई बड़ी छेड़छाड़ न होने के कारण बृजलाल खाबरी की कुर्सी बच गई थी। लेकिन कार्यकर्ता बता रहे हैं कि स्थिति अब ज्यादा चिंताजनक होती जा रही है।
प्रियंका के कारण सब चुप
दरअसल, बृजलाल खाबरी को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर प्रियंका गांधी लोकर आई थीं। उनका मानना था कि दलित समुदाय से आने वाले बृजलाल खाबरी कांग्रेस के परंपरागत वोटरों दलितों और पिछड़ों को उसके पाले में लाने में कामयाब होंगे। लेकिन खाबरी अब तक इस तरह का कोई बड़ा असर छो़ड़ने में नाकाम साबित हुए हैं। लेकिन प्रियंका गांधी का उन पर वरदहस्त होने के कारण पार्टी का कोई निचले स्तर का नेता उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद गरिमामय होता है। इस बात पर ध्यान दिए बिना कि अध्यक्ष पद पर कौन बैठा हुआ है, सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को बैठक में शामिल होकर संबंधित मुद्दों पर अपनी राय रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी शासन-प्रशासन में एक तरह की अराजकता देखी जा रही है और इस कारण जनता में सरकार के विरुद्ध बहुत अधिक गुस्सा है। विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस का यह कर्तव्य है कि वह जनता को एक विकल्प उपलब्ध कराए। इसके लिए पार्टी में सबको मिलजुलकर काम करना चाहिए।