फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why not pension to all public representatives? BJP MP said There should be salary for village heads also

संसद: सभी जनप्रतिनिधियों को पेंशन क्यों नहीं? भाजपा सांसद ने कहा- ग्राम प्रधानों के लिए भी हो वेतन की व्यवस्था

Tue, 05 Dec 2023 07:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 05 Dec 2023 07:03 PM IST
सार

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने आज शून्य काल में ग्राम प्रधानों से लेकर नगर निगम के महापौरों तक को वेतन, भत्ता और पेंशन दिये जाने की मांग की।

विज्ञापन
Why not pension to all public representatives? BJP MP said There should be salary for village heads also
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश में जनप्रतिनिधियों की दो कैटेगरी है। एक में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और सांसद-विधेयक जैसे लोग आते हैं जिनके लिए संविधान में वेतन और पेंशन की व्यवस्था है। वहीं, ग्राम प्रधान और नगर निगमों के जनप्रतिनिधि भी जनता का ही प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन इसके बाद भी उनके लिए वेतन-पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है। भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने संसद में मांग की है कि उचित कानून परिवर्तन कर इस भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए।   

विज्ञापन


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने आज शून्य काल में ग्राम प्रधानों से लेकर नगर निगम के महापौरों तक को वेतन, भत्ता और पेंशन दिये जाने की मांग की और कहा कि इसके लिए संविधान संशोधन करते हुए इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। अग्रवाल ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन प्राप्त करना जनप्रतिनिधियों सहित सभी नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन भारत में स्वयं जनप्रतिनिधियों में ही दो वर्ग बना दिए गए हैं। 
विज्ञापन


एक वर्ग को संवैधानिक प्रावधानों के तहत बाकायदा कानून बनाकर वेतन, भत्ते और पेंशन देने की व्यवस्था की गई है। जबकि ग्राम प्रधानों से लेकर नगर निगमों के महापौर तक किसी के लिए भी वेतन, भत्ते और पेंशन की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि 1991-92 में संविधान के 73-74वें संशोधन का ढिंढोरा तो बहुत पीटा गया, लेकिन जनप्रतिनिधियों का आर्थिक सशक्तिकरण नहीं किया गया। यह भेदभाव समाप्त किया जाना चाहिए और इन जनप्रतिनिधियों को भी उचित वेतन-भत्ता दिए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed