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बारह साल में क्यों नहीं बनी मदरसों की नियमावली: हाईकोर्ट

Sat, 14 May 2016 05:49 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 14 May 2016 05:49 AM IST
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Why in 12 years no rules made for madarasas: High court
इलाहाबाद हाईकोर्ट

यूपी के अरबी फारसी मदरसों के लिए नियमावली बनाए जाने को लेकर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। पूछा है कि मदरसा शिक्षा परिषद् अधिनियम पारित होने के 12 वर्षों के बाद भी सरकार कर्मचारियों की नियमावली क्यों नहीं बना सकी। कोर्ट ने इस उदासीनता को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मुख्य सचिव से जवाब मांगा है।

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मदरसा जियाउल ऊलूम गोरखपुर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अशोक ने इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। याची का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एएन मिश्र ने कहा कि याची वित्तीय सहायता प्राप्त मदरसे का कर्मचारी है।
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प्रबंध समिति ने उसे बर्खास्त कर दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि मदरसा अल्प संख्यक संस्था है, इसलिए बर्खास्तगी का अनुमोदन बीएसए से कराने की आवश्यकता नहीं है। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा को याची का प्रत्यावेदन निस्तारित करने का आदेश दिया था।
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सहायक निदेशक ने बर्खास्तगी को अवैध करार दिया। प्रबंध समिति ने निदेशक के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी, दूसरी ओर याची ने भी वेतन देने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की। कोर्ट ने जानना चाहा है कि इस मामले में कौन सी नियमावली लागू होगी। कोर्ट को बताया गया कि कर्मचारी सेवा नियमावली बनाने की प्रक्रिया जारी है, मगर तब तक उसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। याचिका पर 25 मई को अगली सुनवाई होगी।

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