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Maharashtra: सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को शरद पवार ने क्यों बनाया कार्यकारी अध्यक्ष? समझें NCP की सियासत

Sat, 10 Jun 2023 03:12 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sat, 10 Jun 2023 03:12 PM IST
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सार
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को ही क्यों कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया? अजित पवार का अब क्या भविष्य होगा? एनसीपी की क्या नई रणनीति है? आइए समझते हैं... 
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Why did Sharad Pawar make Supriya Sule and Praful Patel the working president of NCP? Understand the politics
शरद पवार, सुप्रिया सुले और अजित पवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल जारी है। शिवसेना-भाजपा गठबंधन में दरार की खबरों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने बड़ा एलान कर दिया। पार्टी के 25वें स्थापना दिवस समारोह में पवार ने बेटी सुप्रिया सुले और पार्टी के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया। भतीजे अजित पवार को लेकर कोई एलान नहीं हुआ। पवार की ओर से हुए एलान में सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब की जिम्मेदारी भी दी गई है। 


पवार के इस एलान के साथ ही कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को ही क्यों कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया? अजित पवार का अब क्या भविष्य होगा? एनसीपी की क्या नई रणनीति है? आइए समझते हैं... 


 

पहले जानिए एनसीपी में अब तक क्या-क्या हुआ? 
एनसीपी में सियासी बदलाव की कहानी नवंबर 2019 से शुरू हुई थी। तब विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली थी। शिवसेना के 56 और एनसीपी के 54 प्रत्याशी चुनाव जीते थे। कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी। 

भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाली शिवसेना ने मुख्यमंत्री के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ लिया। भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन बहुमत के आंकड़ों से दूर थी। बहुमत के लिए पार्टी को 145 विधायकों का समर्थन चाहिए था। आनन-फानन में अजित पवार ने एनसीपी का समर्थन दे दिया और देवेंद्र फडणवीस सीएम बन गए। अजित पवार ने डिप्टी सीएम का पद की शपथ ली।

ये सबकुछ अजित ने खुद के बल पर किया। मतलब इसके लिए उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की मंजूरी नहीं ली थी। कुल मिलाकर ये एक तरह से बगावत थी। इसका असर हुआ कि पांच दिन के अंदर ही एनसीपी ने अपना समर्थन वापस ले लिया। अजित चाहते हुए भी भाजपा के साथ नहीं जा पाए। देवेंद्र फडणवीस की सरकार गिर गई। 

उधर, एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना ली। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनाए गए, जबकि अजित पवार को डिप्टी सीएम का पद फिर से मिल गया। जब शिवसेना में दो फाड़ हुआ और वापस भाजपा की सरकार बनी तो अजित गुट में हलचल तेज हो गई। कई एक्सपर्ट कहते हैं कि अजित गुट चाहता है कि भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में राजनीति करें, जबकि पवार ऐसा नहीं चाहते हैं। 

दो मई को शरद पवार ने अचानक अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे तक इसको लेकर खूब गहमा-गहमी रही, बाद में नेताओं के कहने पर पवार ने अपना इस्तीफा वापस भी ले लिया। हालांकि, तभी ये तय हो गया था कि शरद पवार पार्टी में कुछ बड़ा करने वाले हैं।

 'अमर उजाला डिजिटल' ने दो मई को ही बता दिया था कि पवार दो कार्यकारी अध्यक्ष बना सकते हैं और इसमें सुप्रिया सुले को जिम्मेदारी मिल सकती है। हुआ भी कुछ ऐसा ही। आज पार्टी के 25वें स्थापना दिवस समारोह पर शरद पवार ने दो कार्यकारी अध्यक्ष के नामों का एलान किया। इसमें एक बेटी सुप्रिया सुले हैं तो दूसरे पार्टी के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल का नाम है। सुप्रिया को केंद्रीय चुनाव समिति का प्रमुख भी बनाया गया है। 
 

सुप्रिया और प्रफुल्ल को ही क्यों बनाया कार्यकारी अध्यक्ष? 
इसे समझने के लिए हमने महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषक आनंद त्रिपाठी से बात की। पिछले एक साल से शरद पवार इसी की भूमिका बना रहे थे। इसके पीछे पार्टी में चल रहा द्वंद बड़ा कारण है। पवार चाहते तो सीधे सुप्रिया को अध्यक्ष बना सकते थे, लेकिन वह जानते हैं कि ऐसा करने से पार्टी में विरोध शुरू हो जाएगा। पार्टी के टूटने की आशंका भी है। खासतौर पर भतीजे अजित पवार का विरोध झेलना पड़ेगा। ऐसे में शरद पवार ने धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाना ठीक समझा।'

आनंद के अनुसार, 'दो मई को शरद पवार का इस्तीफा भी इसी का हिस्सा था। वह यह देखना चाहते थे कि जिस पार्टी को उन्होंने खड़ा किया है, आज की स्थिति में उसमें कितने लोग उनके साथ हैं। इस्तीफे के बाद जिस तरह से उन्हें समर्थन मिला वह समझ गए कि अभी भी पार्टी में उन्हें चाहने वाले बहुमत में हैं। आज पार्टी का 25वां स्थापना दिवस समारोह है। इससे बेहतर दिन सुप्रिया के नाम के एलान का नहीं हो सकता था। यही कारण है कि आज के दिन ही उन्होंने सुप्रिया को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का एलान किया। शरद पवार पूरी तरह से पार्टी सुप्रिया के हाथ में ही देना चाहते हैं, लेकिन वह सोच-समझकर कदम आगे बढ़ा रहे हैं।'
 

आगे आनंद ने दो सुप्रिया और प्रफुल्ल के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के दो कारण बताए। 

1. सुप्रिया के जरिए केंद्र में कदम मजबूत रखना चाहते हैं: सुप्रिया सुले शरद पवार की बेटी हैं। कांग्रेस से लेकर सपा, बसपा, शिवसेना आरजेडी, टीएमसी हर पार्टियों ने अपने परिवार के लोगों को ही आगे बढ़ाया है। शरद पवार सुप्रिया सुले को अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें माहौल बनाना पड़ेगा। यही कारण है कि पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति भतीजे अजित पवार को संभालने के लिए कहा है तो केंद्र की कमान सुप्रिया के हाथ में सौंप दी। ये सुप्रिया को अध्यक्ष बनाने की पहली सीढ़ी है। 
 

2. परिवारवार का आरोप न लगे, इसलिए प्रफुल्ल को भी दी जिम्मेदारी : शरद पवार ने जिस दिन इस्तीफा दिया था, उसी दिन ये साफ हो गया था। तभी तय था कि पार्टी में दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाएंगे। एक घर का सदस्य होगा तो दूसरा बाहरी। बाहरी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर शरद पवार परिवारवाद के आरोपों से बचना चाहते हैं। प्रफुल्ल पवार परिवार के करीबी हैं और वह वही करेंगे जो पवार परिवार कहेगा। प्रफुल्ल आर्थिक मामलों में भी मजबूत हैं। कई उद्योगपतियों से उनके अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में वह जरूरत पड़ने पर पार्टी को आर्थिक तौर पर भी मजबूत बना सकते हैं।  

तो अजित पवार अब क्या करेंगे? 
आनंद कहते हैं, 'सुप्रिया और प्रफुल्ल के नाम के एलान से पहले शरद पवार ने अजित पवार को काफी मनाने की कोशिश की है। अजित को ये भरोसा दिलाया गया है कि वह महाराष्ट्र की राजनीति खुलकर कर सकते हैं। अगर भविष्य में पार्टी महाराष्ट्र में अच्छा करती है तो मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के पहले दावेदार अजित ही होंगे। ऐसे में अब देखना होगा कि अजित आगे क्या करते हैं। हालांकि, संभावना ये भी है कि अगर पार्टी में बात नहीं बनी तो अजित आने वाले दिनों में भाजपा में शामिल हो सकते हैं। दूसरी संभावना ये भी है कि वह खुद की नई पार्टी बना सकते हैं।'
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