Biplab Deb Resigns: त्रिपुरा चुनाव से नौ महीने पहले भाजपा ने क्यों बदला मुख्यमंत्री, जानें बिप्लब देब के खिलाफ गईं कौन सी बातें?
बिप्लब देब के इस्तीफे के चंद घंटे बाद ही पार्टी ने नए मुख्यमंत्री का एलान कर दिया। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद माणिक साहा नए मुख्यमंत्री होंगे। पेशे से दंत चिकित्सक साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विधानसभा चुनाव से करीब नौ महीने पहले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने इस्तीफा दे दिया है। देब ने आलाकमान के आदेश पर ये कदम उठाया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि ये फैसला संगठन को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
आखिर ऐसा क्या हुआ जो बिप्लब देब ने अचानक इस्तीफा दे दिया?
ये इस्तीफा अचानक नहीं हुआ है। फरवरी 2018 में हुए चुनाव में भाजपा ने एतिहासिक जीत दर्ज की। पार्टी ने युवा चेहरे बिप्लब देब राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि, दो साल बाद ही उनके खिलाफ पार्टी में विरोध की खबरें आने लगी थीं। मुख्यमंत्री पर मनमानी करने पार्टी के पुराने नेताओं की नहीं सुनने का आरोप लगने लगा। अक्तूबर 2020 में तो 11 नाराज विधायक बिप्लब देब की शिकायत लेकर दिल्ली पहुंच गए थे।
सूर्यमणि नगर से असंतुष्ट विधायक राम प्रसाद पाल इन विधायकों को नेतृत्व कर रहे थे। इन विधायकों ने पार्टी महासचिव बीएल संतोष से मिलकर सीएम के मनमाने रवैये की शिकायत की थी। उस वक्त नाराज विधायकों ने दावा किया था कि कम से कम 25 विधायक मुख्यमंत्री के खिलाफ हैं। इस विद्रोह के बीच देब को हटाने की अटकलें थी। हालांकि, देब आलाकमान को संतुष्ट करने में सफल रहे थे।
अक्तूबर 2021 में भाजपा विधायक रहे आशीष दास तृणमूल कांग्रेस शामिल हो गए थे। दास दो साल से बिप्लब देब का विरोध कर रहे थे। इस साल की शुरुआत में पार्टी में नए सिरे से बगावत शुरू हुई। फरवरी की शुरुआत में ही भाजपा के दो विधायकों सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं दोनों विधायकों ने पार्टी भी छोड़ दी। पार्टी छोड़ने के एक दिन बाद ही दोनों नेता कांग्रेस में शामिल हो गए। सुदीप रॉय बिप्लब सरकार में मंत्री भी रहे थे।
क्या सिर्फ पार्टी के अंदरूनी विरोध की वजह से बिप्लब पर गिरी गाज?
विपक्ष भी लगातार बिप्लब सरकार को घेर रहा है। हाल ही में कांग्रेस ने बिप्लब देब के इस्तीफे की मांग की थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है। भाजपा राज्य में आए दिन हत्या, दुष्कर्म और दंगे हो रहे हैं। छह मई को ही कांग्रेस नेता सुदीप बर्मन ने आरोप लगाया कि बीते चार महीने में 23 हत्याएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में राज्य में 127 दुष्कर्म की वारदातें हुई थीं। जो 2021 में बढ़कर 137 हो गईं। उन्होंने कहा कि बिप्लब देब सरकार में राज्य में कोई सुरक्षित नहीं है। कांग्रेस ने कहा कि बिप्लब राज्य की जनता का विश्वास खो चुके हैं।
इसके साथ ही भाजपा को आदिवासी क्षेत्रों में भी लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। इन इलाकों से पार्टी से जुड़े नेता और कार्यकर्ता लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। स्थानीय पार्टी टीआईपीआरए मोथा इन इलाकों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। बीते एक साल के दौरान भाजपा के कई स्थानीय नेता टीआईपीआरए मोथा में शामिल हो गए हैं।
अब आगे क्या होगा?
बिप्लब देब के इस्तीफे के चंद घंटे बाद ही पार्टी ने नए मुख्यमंत्री का एलान कर दिया। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद माणिक साहा नए मुख्यमंत्री होंगे। पेशे से दंत चिकित्सक साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। 2020 में उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। साहा पिछले महीने ही राज्यसभा सांसद बने हैं। शनिवार शाम को उन्हें पार्टी ने विधायक दल का नेता चुन लिया। अब साहा जल्द ही नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। वहीं, अटकलें हैं कि बिप्लब देव को साहा की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके साथ ही साहा के इस्तीफे के बाद खाली होने वाली राज्यसभा सीट से बिप्लब राज्यसभा भी जा सकते हैं।
10 महीने में भाजपा ने बदले चार मुख्यमंत्री
बीती चार जुलाई को उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत की जगह भाजपा ने पुष्कर धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। उसी महीने महीने कर्नाटक में बीएस येदुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया था। सितंबर में विजय रूपाणी को हटाकर भूपेंद्र पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। अब त्रिपुरा में बिप्लब देब की जगह माणिक साहा नए मुख्यमंत्री होंगे।
कैसी है त्रिपुरा विधानसभा की स्थिति?
60 सदस्यों की विधानसभा में 2018 के चुनाव में भाजपा को 36 सीटें मिलीं थी। आशीष दास, सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा के पार्टी छोड़ने के बाद इस वक्त भाजपा के 33 विधायक हैं। उसकी सहयोगी IPFT के सात विधायक हैं। विपक्षी सीपीएम के 15 विधायक हैं। वहीं, पांच सीटें खाली हैं।