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कानों देखी: कौन बनेगा भाजपा अध्यक्ष? प्रधानमंत्री की संघ प्रमुख से मुलाकात पर सबकी नजर

Thu, 20 Mar 2025 09:17 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 20 Mar 2025 09:17 PM IST
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Who will become the BJP president? PM Modi meeting with RSS chief Mohan Bhagwat will give big indications
पीएम मोदी- संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला
भाजपा में अध्यक्ष की कुर्सी पर नया चेहरा आना है। लंबे समय से आना है। कौन आएगा? भाजपा मुख्यालय से लेकर संसद भवन के गलियारे तक इस पर चर्चा और कयास हैं। सबकी निगाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात पर टिकी है। प्रधानमंत्री की 30 मार्च को नागपुर की प्रस्तावित यात्रा चर्चा में है। प्रधानमंत्री वहां संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में होने वाले कार्यक्रमों की रुपरेखा और चर्चा के लिए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस दौरान उनका खास जोर संघ के साथ भाजपा के समन्वय पर रहेगा। क्योंकि इस समन्वय से दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर का नतीजा सामने है। मध्य प्रदेश में में बैठे संघ के एक बड़े नेता का कहना है कि कई चिंताएं संघ की भी हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद जो राह निकलेगी, उसमें नए भाजपा अध्यक्ष का स्वरुप भी होगा।
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कंगना रनौत के चक्कर में ....
मंडी से भाजपा सांसद अभिनेत्री कंगना रनौत का गजब का क्रेज है। संसद से बाहर निकलती हैं तो तमाम कैमरे, निगाहें उन्हें ढूंढती हैं। कई को लगता है कि आज कुछ कंगना बोलेंगी तो दिहाड़ी पूरी हो जाएगी और कंगना हैं कि सब समझ चुकी हैं। ऐसे सुरक्षा ऐजेंसी के भी रंगरूट निगाह रखने में लगे होते हैं। कुछ तो वीडियो बनाते भी देखे जाते हैं। आज का भी नजारा कुछ ऐसा था। आज सुरक्षा एजेंसी के एक रंगरूट को यह मंहगा पड़ गया। जब कंगना के पीछे तेजी से निकला तो उसकी कोहनी बगल में खड़ी शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी को छू गई। अब आप समझ सकते हैं कि फिर क्या हुआ होगा? खैर, अन्य सुरक्षा के साथियों ने संभाल लिया, लेकिन प्रियंका को एक अभिनेत्री, वह भी कंगना के पीछे पड़े लोग तो...। फिर थोड़ा झिड़कना तो बनता है।
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कांग्रेस ने बिहार में उतार दिया अपना समाजवाद
कांग्रेस के नेता कन्हैया कुमार जब डॉयस से बोलते हैं तो पार्टी के सांसद राहुल गांधी को अच्छे लगते हैं। सांसद इमरान प्रतापगढ़ी भी अच्छे लगते हैं। कन्हैया कुमार शुरू से बिहार से ही राजनीति करना चाहते हैं। उनकी जन्मभूमि है। वॉकपटु भी हैं। कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री की माने तो बिहार में कांग्रेस का न केवल युवा चेहरा बल्कि पार्टी का समाजवाद हैं। सुनील कानूगोलू राज्य में कांग्रेस की जमीन हरी करने का अपना काम शुरू कर चुके हैं। राज्य के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु भी एक सोच लेकर गए हैं। इसी क्रम में राहुल गांधी की अनुमति के बाद दलित विधायक राजेश कुमार को नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। पार्टी पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह को दूसरी जिम्मेदारी देगी। यह एक संदेश बिहार, झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए भी है। दिल्ली में पहले ही संदीप दीक्षित को आगे करके पार्टी अकेले चुनाव लड़ चुकी है। इसलिए संदेश सहयोगी दलों को भी है। सब सद्भाव में रहे तो ठीक है, लेकिन सहयोगी दल महत्व न समझें तो सत्ता से कुछ दिन और  दूर रहने में कांग्रेस को संकोच नहीं।
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क्या भाजपा के सपनों पर पानी फेरेगा स्टालिन का उत्तर बनाम दक्षिण?
कांग्रेस अभी भी दक्षिण भारत की प्रमुख पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम का साथ देने की गहराई को नाप रही है। हालांकि, राजनीति के इतने पुराने अनुभवी कांग्रेस अध्यक्ष को पता है कि यह मुद्दा खेल करेगा। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी पहले ही परिसीमन का विरोध कर चुके हैं। अब यह दक्षिण बनाम उत्तर का रूप लेने लगा है। एम थंबीदुरै का कहना है कि यह मुद्दा अब दक्षिण भारत में खूब रफ्तार लेने लगा है। आज इस मुद्दे को लेकर राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। डीएमके सांसदों के टी-शर्ट पहनकर आने पर उपसभापति हरिवंश सिंह ने राज्यसभा की कार्यवाही को 21 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया। कुछ ऐसा ही हाल लोकसभा में हुआ। डीमके के नेता परिसीमन और नई शिक्षा नीति में तीन भाषा के प्रावधान को लगातार अपना हथियार बना रहे हैं। अब भाजपा के रणनीतिकारों के भी पसीने छूटने लगे हैं। क्योंकि इसमें कोई तमिलनाडु का मामला नहीं है। इसकी हवा में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल के भी आने की संभावना बढ़ने लगी है। लिहाजा भाजपा में इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है।

राहुल गांधी और प्रियंका की केमिस्ट्री पर भाजपा वाले रखते हैं निगाह
भाजपा के उत्तर प्रदेश से एक सांसद हैं। संसद भवन में उन्हें राहुल गांधी और प्रियंका का साथ अच्छा लगता है। लेकिन पार्टी ऐसी है कि नाम छपवाकर बयान नहीं दे सकते। इसका उन्हें मसोस भी है। आज पुरानी संसद के गलियारे पर राहुल गांधी के कसीदे पढ़ रहे थे। कह रहे थे कि कोई कुछ भी कहे, लेकिन मानना पड़ेगा कि बंदे में दम है। साथ वाले ने प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम ले लिया। साहब दो कदम और आगे बढ़े। बोले देखो मैं तो पार्टी के सांसदों से भी कहता हूं कि कहो कुछ भी, लेकिन भाई-बहन की केमिस्ट्री भी तो देखो।


आपको पता था कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा होंगी?
बिहार के एक बड़े पत्रकार अपने राज्य में चुनावी हवा टटोल रहे थे। सांसद उन्हें घर पर रात्रिभोज में आने की दावत दे रहे थे। हंसी ठिठोली भी चल रही थी। अचानक एक सवाल आया कि चुनौउवा में नीतीशे कुमार चलेंगे न? सांसद बिहार के महत्वपूर्ण नेता हैं। नजाकत को भांप गए। बोल पड़े कि सम्राट के सुनला नाहीं। अगवा न लगवाइए। चुनौउवा में नीतीशे कुमार रहेंगे। अब तो दूसरा सवाल बनता था कि फिर इसके आगे? तो नेता जी की हाथ छुड़ाकर निकलने की बारी थी। जाते-जाते बोल गए कि आपको पता था कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बनेंगी?
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