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Justice BS Reddy: 'जब सड़क खामोश... सदन आवारा..'; लोहिया का जिक्र कर बोले उपराष्ट्रपति पद के विपक्षी प्रत्याशी

Thu, 21 Aug 2025 01:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 21 Aug 2025 01:10 AM IST
सार

विपक्षी गठबंधन इंडिया ने उपराष्ट्रपति पद चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। रेड्डी ने बुधवार को गठबंधन के सदस्यों से सदन के सेंट्रल हॉल में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने लोहिया का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तारीफ की। 
 

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'When road silent, house wandering' Opposition Vice President candidate former judge B Sudarshan Reddy
उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी और राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

विपक्षी गठबंधन इंडिया के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी ने बुधवार को गठबंधन के सदस्यों से सदन के सेंट्रल हॉल में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने लोहिया का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोगों की आवाज उठाते रहते हैं। उनके लिए यह आदत और स्वभाव बन चुका है। वे लगातार चुनौतियों का सामना करते रहते हैं। अपनी कोशिश के तहत उन्होंने तेलंगाना सरकार को व्यवस्थित तरीके से जाति जनगणना करने के लिए राजी कर लिया। 

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पूर्व न्यायाधीश रेड्डी ने कहा, 'मुझे लोहिया जी की कही एक बात याद आ गई, 'जब सड़क खामोश होती है, सदन आवारा होता है। राहुल गांधी सड़कों को खामोश नहीं रहने देते। यह उनका दूसरा स्वभाव और आदत बन गया है, और एक के बाद एक चुनौतियों का सामना करना उनकी यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने तेलंगाना सरकार को इसे (जाति जनगणना) व्यवस्थित तरीके से करने के लिए सफलतापूर्वक राजी कर लिया।'
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सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी जाति जनगणना 
पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी ने तेलंगाना में जाति जनगणना पर कहा कि जब यह काम पूरा हो गया और मैंने रिपोर्ट पेश की, तब मैंने कहा था कि यह मौजूदा सत्ताधारी व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, और मैं सही साबित हुआ। अब सवाल यह है कि आगे यह काम कितनी गहराई और गंभीरता से होगा, या सिर्फ दिखावे के लिए किया जाएगा। अगर सरकार वाकई गंभीर है, तो मुझे उन्हें सलाह देने की जरूर ही नहीं है। 
 

1971 में एक वकील के रूप में शुरू हुई मेरी यात्रा
रेड्डी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने मुझसे पूछा कि आप राजनीतिक पचड़े में क्यों पड़ रहे हैं? इस सवाल के जवाब में मैंने कहा कि मेरी यात्रा 1971 में वकील के रूप में शुरू हुई थी और यह आज भी जारी है। वर्तमान चुनौती भी उसी यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति का पद असल में राजनीतिक पद नहीं है, बल्कि यह संविधान से जुड़ी जिम्मेदारी है। 
 

गंभीर चुनौती का सामना कर रहा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रेड्डी ने बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर कहा कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। आज बिहार के सामने जो संकट है, उससे बड़ा संविधान और लोकतंत्र के लिए कोई खतरा नहीं हो सकता। वोट देना आम आदमी का सबसे बड़ा हथियार है। अगर वोट देने का अधिकार छीन लिया जाए, तो लोकतंत्र का असली मतलब ही खत्म हो जाता है। 
 

80 सांसदों ने रेड्डी के नामांकन पत्र में प्रस्तावक के रूप में किए हस्ताक्षर
विपक्षी गठबंधन इंडिया ने उपराष्ट्रपति पद चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। उनके नामांकन पत्र पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव समेत 80 अन्य सांसदों ने प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए। 

 

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