WB: हाथियों का झुंड भगाने के लिए आग के गोले-नुकीली छड़ें हुईं इस्तेमाल, सोता रहा वन विभाग, एक हाथी की गई जान
छह हाथी राज कॉलेज कॉलोनी में घुस आए और उत्पात मचाना शुरू कर दिया था। पहले कुछ दीवारें तोड़ीं। कुछ घंटों के बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति को मार डाला। इससे ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया।
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जंगली जानवरों को भगाने के लिए नुकीली छड़ों और आग के गोले का इस्तेमाल करना साफ मना है। इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। हालांकि, पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले से एक चौंकाने और दिल दहलाने वाली जानकारी सामने आई। यहां के एक गांव के लोगों ने सारी मानवता भुलाकर हाथियों को भगाने के लिए आग लगी लोहे की छड़ों का इस्तेमाल किया। इसके चलते बेजुबान की जान चली गई। इस घटना की जानकारी पशु प्रेमी प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने शनिवार दोपहर सोशल मीडिया पर दी।
कॉलोनी में गुरुवार सुबह घुस आए थे हाथी
बताया जा रहा कि गुरुवार सुबह छह हाथी राज कॉलेज कॉलोनी में घुस आए और उत्पात मचाना शुरू कर दिया। पहले कुछ दीवारें तोड़ीं। कुछ घंटों के बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति को मार डाला। जैसे ही हाथियों ने उत्पात मचाया लोहे की छड़ों और जलती मशालों से लैस एक 'हुल्ला' टीम उन्हें भगाने के लिए वहां पहुंच गई। पशु प्रेमी ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने संकेत दिया कि 'हुल्ला टीम' वन विभाग की जानकारी में वहां हाथियों को भगाने आई थी।
On August 12, #India celeberated #WorldElephantDay2024 & heard a lot from @moefcc on all the great things v have done for #elephants.
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I would like to hear from @moefcc and @ForestDeptWB
now on the horrific harassment, torture and killing of an #elephant in #Jhargam #WestBengal… pic.twitter.com/KTTzAdStrG — prerna singh bindra 🐘🐅🐾 (@prernabindra) August 17, 2024
कौन हैं हुल्ला?
हुल्ला टीम को खेत से हाथियों को भगाने का काम सौंपा जाता है। पश्चिम बंगाल में कई हुल्ला टीम हैं। इनके द्वारा नुकीली छड़ों का उपयोग करने और आग के गोले फेंकने की प्रथा को बिंद्रा और अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था।
ठीक से चल भी नहीं पा रहा था
वन विभाग ने धरमपुर फुटबॉल मैदान में झुंड के एक हाथी पर कई बार दवाई छिड़की। बाद में अधिकारियों ने उसे मुक्त कर दिया, लेकिन वह ठीक से चल नहीं पा रहा था। अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि यह वही हाथी था, जिसने दिन में बुजुर्ग व्यक्ति को मारा था।
आठ घंटे बाद ले गए इलाज के लिए
पशु प्रेमी प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने बताया कि हुल्ला टीम ने हमला की गई मादा हाथियों में से एक के शरीर में आग लगी लोहे की छड़ चिपकी हुई थी, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई। आठ घंटे से अधिक की देरी के बाद देर रात वन विभाग हाथी को इलाज के लिए ले गया। हालांकि, वन अधिकारियों की ओर से कोई बयान नहीं आया है। मगर, पशु प्रेमी ने दावा किया कि मादा हाथी ने शनिवार सुबह चोटों के कारण दम तोड़ दिया।
सिंह ने अपनी पोस्ट में बताया कि इस दौरान एक अन्य हाथी गंभीर रूप से घायल हुआ। वह खड़ा होने में असमर्थ था, उसे बुलडोजर की मदद से जंगल में धकेला जा रहा था।