फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   west bengal news updates appointed Bengal SEC trusting his ability to conduct free & fair polls: Governor Bose

West Bengal: राज्यपाल बोले- SEC की निष्क्रियता से लोग निराश; राज्य चुनाव आयुक्त ने की केंद्रीय बलों की मांग

Thu, 22 Jun 2023 10:52 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 22 Jun 2023 10:52 PM IST
सार

West Bengal: राज्यपाल ने कहा कि लोगों को निडर होकर मतदान करने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि लोग एसईसी की स्पष्ट निष्क्रियता से निराश हैं। इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हिंसा हो रही है

विज्ञापन
west bengal news updates appointed Bengal SEC trusting his ability to conduct free & fair polls: Governor Bose
CV Anand Bose - फोटो : Twitter/@KeralaGovernor

विस्तार

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने बुधवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त (एसईसी) का नियुक्ति पत्र नामंजूर कर दिया था। इसके एक दिन बाद बोस ने कहा कि उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की उनकी क्षमता पर भरोसा करते हुए पूर्व नौकरशाह को नियुक्त किया था। उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं और एसईसी की निष्क्रियता के कारण बंगाल के लोग निराश हैं।

विज्ञापन

बोस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, मैंने इस भरोसे के साथ एसईसी नियुक्त किया था कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से पंचायत चुनाव कराएंगे। लोगों को निडर होकर मतदान करने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि लोग एसईसी की स्पष्ट निष्क्रियता से निराश हैं। उन्होंने कहा कि इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हिंसा हो रही है, एसईसी को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि इसे निष्पक्ष दिखना भी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

बोस की यह प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सिन्हा को हटाने की संभावना से इनकार करने के कुछ ही मिनट बाद आई है। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि एसईसी को निष्पक्ष होना चाहिए और यह उनका कर्तव्य है कि वह आम आदमी के जीवन की रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि वे अपना वोट डाल सकें।
 

विज्ञापन

उन्होंने कहा, एसईसी के पास पुलिस और मजिस्ट्रेट से ऊपर की शक्ति है। बंगाल उम्मीद करता है कि एसईसी अपना कर्तव्य निभाएगा। एसईसी मानव रक्त की हर बूंद के लिए जवाबदेह है जो क्षेत्र में बहाए जाते हैं। लोग कार्रवाई चाहते हैं न कि कार्रवाई का बहाना। बंगाल के लोगों के प्रति प्रतिबद्ध होने की बात कहते हुए बोस ने यह भी कहा कि इंसानों के खून को सौदेबाजी का मुद्दा नहीं बनाया जा सकता।

उन्होंने कहा, 'हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि एसईसी अपना कर्तव्य निभाएगा। (लेकिन) आसपास क्या हो रहा है? मानव रक्त को सौदेबाजी का मुद्दा नहीं बनाया जा सकता है। लोगों को जीवन का अधिकार है, शांति का अधिकार है। शांति स्थापित होगी। यह कोई वादा नहीं है, बल्कि बंगाल के लोगों के प्रति प्रतिबद्धता है, जिनसे मैं प्यार करता हूं। वे मुझ पर भरोसा करते हैं। मैं निश्चित रूप से उस मुद्दे पर बोलूंगा। निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होना चाहिए और बंगाल की धरती से हिंसा को उखाड़ फेंका जाना चाहिए।' 

मुख्यमंत्री ने सीईसी को हटाने की खबरों को किया खारिज
इससे पहले मुख्यमंत्री बनर्जी ने सीईसी राजीव सिन्हा को हटाने की खबरों को खारिज किया था। उन्होंने कहा कि एसईसी को हटाना एक जटिल प्रक्रिया है और इसे महाभियोग के माध्यम से किया जाना चाहिए। एसईसी को यूं ही हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सिन्हा की राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति की फाइल को खुद मंजूरी दी है।
 

उन्होंने कहा कि महाभियोग के जरिए न्यायाधीशों की तरह ही एसईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। राज्य में चुनाव संबंधी हिंसा के मुद्दे पर बोलते हुए बनर्जी ने कहा, बंगाल में चुनाव नामांकन प्रक्रिया कभी भी इतनी शांतिपूर्ण नहीं रही है। यह हमारी पार्टी के कार्यकर्ता हैं जो मारे गए हैं। तीन से चार बूथों पर कुछ घटनाएं हुई हैं। 

राज्य के विभिन्न हिस्सों में आठ जुलाई को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने को लेकर व्यापक हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। बनर्जी ने इन दावों का खंडन किया कि विपक्ष को नामांकन दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि चुनाव के लिए लगभग 2.3 लाख नामांकन दाखिल किए गए थे।

एसईसी ने केंद्रीय गृहमंत्रालय से की केंद्रीय बलों की मांग
वहीं, एसईसी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर पंचायत चुनावों में तैनाती के लिए गृह मंत्रालय से केंद्रीय बलों की 800 कंपनियों की मांग की है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा ने केंद्र को पत्र लिखकर पंचायत चुनावों में तैनाती के लिए बलों की मांग की है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की एक कंपनी में आम तौर पर लगभग सौ कर्मी होते हैं।
 

अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने बुधवार को एसईसी को 24 घंटे के भीतर 82,000 से अधिक केंद्रीय बलों के कर्मियों की मांग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि आठ जुलाई के चुनाव के लिए एसईसी ने केंद्रीय बलों की सिर्फ 22 कंपनियों की मांग की थी, जो राज्य में 2013 के पंचायत चुनावों के दौरान लाए गए 82,000 केंद्रीय पुलिसकर्मियों का एक छोटा सा हिस्सा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed