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Bengal: शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, कोलकाता नगर निगम को किया भंग; IAS स्मिता पांडे को नियुक्त किया प्रशासक
Mon, 08 Jun 2026 09:46 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 08 Jun 2026 09:46 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता नगर निगम को तत्काल प्रभाव से भंग कर प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। मेयर के इस्तीफे के बाद निर्धारित समय सीमा में नए महापौर का चयन नहीं हो पाने के कारण यह कदम उठाया गया। राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी स्मिता पांडे को निकाय का प्रशासक नियुक्त किया है, जो अगले नगर निगम चुनाव तक प्रशासन संभालेंगी।
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कोलकाता नगर निगम भंग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी स्मिता पांडे को उसका प्रशासक नियुक्त किया। यह फैसला मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद लिया गया। बंगाल सरकार के अनुसार, यह फैसला नागरिक सेवाओं और नगर प्रशासन में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
नगर निगम की ओर से जारी आदेश के अनुसार केएमसी के भंग होने के साथ ही सभी पार्षद, मेयर-इन-काउंसिल के सदस्य, समिति सदस्य और महापौर अपने पदों से हट जाएंगे। यह फैसला कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत किया गया है।
IAS स्मिता पांडे को नियुक्त किया गया प्रशासक
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद निर्धारित 72 घंटे की अनिवार्य अवधि समाप्त हो गई। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से नए मेयर का चुनाव नहीं किया जा सका। आदेश के अनुसार, स्मिता पांडे को निकाय चुनाव होने तक नगर निगम का प्रशासक नियुक्त किया गया है। नए चुनाव इस वर्ष के अंत में होने हैं।
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फिरहाद हकीम ने क्यों छोड़ा मेयर पद?
पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री रह चुके फिरहाद हकीम ने पांच जून को केएमसी की महापौर माला रॉय को अपना इस्तीफा सौंपा था। तृणमूल कांग्रेस के पास कोलकाता नगर निगम में भारी बहुमत था। 144 सदस्यीय निगम में तृणमूल कांग्रेस के 136 पार्षद थे।
पद छोड़ने से पहले पत्रकारों से बातचीत में हकीम ने कहा था कि वह अब अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन उस तरीके से नहीं कर पा रहे थे, जैसा वह इस पद के लिए जरूरी मानते हैं। चार बार विधायक रह चुके हकीम ने कहा कि उन्होंने यह फैसला लेने से पहले पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अनुमति ली थी। उन्होंने कहा, "मैंने अपनी नेता से कहा कि मैं सिर ऊंचा करके जाना चाहता हूं। उन्होंने कहा, ठीक है।"
राज्य के अलग-अलग निकायों में इस्तीफों का दौर जारी
पांच जून को हकीम का इस्तीफा हुआ था, जो बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती और उनकी चंद्रनगर के समकक्ष राम चक्रवर्ती द्वारा अपने पद छोड़ने के एक दिन बाद आया था। इसके अलावा राज्य के विभिन्न नगर निकायों में पार्षदों और पदाधिकारियों के इस्तीफों का सिलसिला भी जारी रहा है। कोलकाता नगर निगम पर 2010 से तृणमूल कांग्रेस का नियंत्रण है। इसके एक वर्ष बाद ममता बनर्जी ने राज्य में 34 वर्षों के वाम शासन का अंत किया था।
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नगर निगम की ओर से जारी आदेश के अनुसार केएमसी के भंग होने के साथ ही सभी पार्षद, मेयर-इन-काउंसिल के सदस्य, समिति सदस्य और महापौर अपने पदों से हट जाएंगे। यह फैसला कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत किया गया है।
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IAS स्मिता पांडे को नियुक्त किया गया प्रशासक
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद निर्धारित 72 घंटे की अनिवार्य अवधि समाप्त हो गई। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से नए मेयर का चुनाव नहीं किया जा सका। आदेश के अनुसार, स्मिता पांडे को निकाय चुनाव होने तक नगर निगम का प्रशासक नियुक्त किया गया है। नए चुनाव इस वर्ष के अंत में होने हैं।
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फिरहाद हकीम ने क्यों छोड़ा मेयर पद?
पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री रह चुके फिरहाद हकीम ने पांच जून को केएमसी की महापौर माला रॉय को अपना इस्तीफा सौंपा था। तृणमूल कांग्रेस के पास कोलकाता नगर निगम में भारी बहुमत था। 144 सदस्यीय निगम में तृणमूल कांग्रेस के 136 पार्षद थे।
पद छोड़ने से पहले पत्रकारों से बातचीत में हकीम ने कहा था कि वह अब अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन उस तरीके से नहीं कर पा रहे थे, जैसा वह इस पद के लिए जरूरी मानते हैं। चार बार विधायक रह चुके हकीम ने कहा कि उन्होंने यह फैसला लेने से पहले पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अनुमति ली थी। उन्होंने कहा, "मैंने अपनी नेता से कहा कि मैं सिर ऊंचा करके जाना चाहता हूं। उन्होंने कहा, ठीक है।"
राज्य के अलग-अलग निकायों में इस्तीफों का दौर जारी
पांच जून को हकीम का इस्तीफा हुआ था, जो बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती और उनकी चंद्रनगर के समकक्ष राम चक्रवर्ती द्वारा अपने पद छोड़ने के एक दिन बाद आया था। इसके अलावा राज्य के विभिन्न नगर निकायों में पार्षदों और पदाधिकारियों के इस्तीफों का सिलसिला भी जारी रहा है। कोलकाता नगर निगम पर 2010 से तृणमूल कांग्रेस का नियंत्रण है। इसके एक वर्ष बाद ममता बनर्जी ने राज्य में 34 वर्षों के वाम शासन का अंत किया था।