नंदीग्राम में मतदान: भाजपा के बड़े मनोवैज्ञानिक दबाव से मुक्त हुईं ममता बनर्जी, बाकी बचे छह चरणों में 'खेला होबे'
- शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी में हुई है कांटे की लड़ाई
- देबांगशू भट्टाचार्य कहते हैं चिंता की कोई बात नहीं 'खेला होबे'
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पश्चिम बंगाल की सबसे 'हॉट' सीट नंदीग्राम में आखिरकार कुछ हिंसा-टकराव के बाद मतदान संपन्न हो गया। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता विवेक गुप्ता, वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी समेत अन्य ने राहत की सांस ली है। 'खेला होबे' तृणमूल कांग्रेस का थीम सांग है। इसे लिखने वाले तृणमूल के नेता देगबांशू भट्टाचार्य कहते हैं कि चिंता की कोई बात नहीं, खेला होबे। बताते हैं नंदीग्राम में मतदान होने के बाद तृणमूल कांग्रेस और उसकी नेता ममता बनर्जी अब बंगाल के छह और चरणों के चुनाव में पूरी ऊर्जा के साथ प्रचार कर सकेंगी।
तृणमूल के नेताओं का कहना है कि अब तो नतीजा दो मई को आएगा और इसके बाद तृणमूल राज्य में तीसरी बार सरकार बनाएगी। तृणमूल के नेताओं के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पश्चिम बंगाल के प्रदेश उपाध्यक्ष राजकमल पाठक कहते हैं कि हार को सामने देखकर एक अप्रैल को दीदी बौखला गई हैं। जबकि अभी उन्हें आठवें चरण के मतदान तक इसी तरह की स्थिति का सामना करना है।
नंदीग्राम बना भाजपा की प्रयोगशाला
वरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि नंदीग्राम को भाजपा ने प्रयोगशाला बना लिया है। अगर यह सीट उसके प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी जीत गए, तो बंगाल में भाजपा की सरकार बन जाएगी। यहां ध्रुवीकरण का प्रयास सफल होने का अर्थ है कि पूरे बंगाल में भाजपा का यह हथियार चल गया। हालांकि शांतनु कहते हैं कि इसका पता दो मई को ही चलेगा। दूसरे भाजपा के लिए नंदीग्राम की सीट निकाल पाना मुश्किल भी है।
पंकज सान्याल अमर उजाला को फोन पर बताते हैं कि नंदीग्राम से पीरजादा अब्बास की पार्टी का उम्मीदवार नहीं है। इसलिए अल्पसंख्यक वोटों के बंटने का खतरा नहीं है। मतदान के पैटर्न पर चलें तो 30 फीसदी अल्पसंख्यक वोट नंदीग्राम में हैं। ईवीएम में पडऩे वाले अल्पसंख्यक मतों का 98 फीसदी ममता बनर्जी को ही मिलने की संभावना है। दूसरी तरफ 70 फीसदी हिन्दू वोट हैं। शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह से हिन्दुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके समर्थक पुरुष भाजपाई टी-शर्ट और महिलाएं उसी रंग की भगवा साड़ी पहन कर प्रचार पर निकली हैं। पूरे नंदीग्राम के हिन्दुओं में सुवेन्दु का अच्छा खासा प्रभाव है।
वह कहते हैं, ध्रुवीकरण की राजनीति खूब हुई है और समर्थन में प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, स्मृति ईरानी समेत अन्य ने प्रचार भी किया है। लेकिन शांतनु और पंकज दोनों का मानना है कि हिन्दू मतों में बंटवारा होगा। बड़ा हिस्सा भले ही अधिकारी परिवार के कारण शुभेंदु के पक्ष में जाए, लेकिन ममता बनर्जी को 50 फीसदी के करीब हिन्दुओं के वोट मिलेंगे। इस तरह से दीदी के जीत की संभावना बनी हुई है।
ममता बनर्जी ने भांप ली थी नंदीग्राम की चुनौती
ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री रहे सूत्र का कहना है कि तृणमूल के नेता रहे शुभेंदु अधिकारी ने घोटाले आदि में अपना नाम आने के बाद डरकर भाजपा ज्वाइन की थी। उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी थी। बताते हैं शुभेंदु की चुनौती स्वीकारने के पहले ममता बनर्जी की टीम ने काफी होमवर्क किया था। ममता ने शुभेंदु को नंदीग्राम में चुनौती देने का फैसला काफी सोच-समझकर लिया था। वह खुद हिंदू बहुल इलाके में किराए पर मकान लेकर प्रचार अभियान में जुट गई थी। इतना ही नहीं नंदीग्राम में मतदान से पांच दिन पहले ही ममता का वहां जाकर टिक जाना और पूरे विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह प्रचार ने उन्हें बड़ा फायदा पहुंचाया है।
अब पूरे बंगाल में 'खेला होबे'
ममता बनर्जी की टीम में गिने जाने वाले सदस्य का कहना है कि नंदीग्राम मे मतदान होने के बाद अब बचे छह चरणों के चुनाव प्रचार के लिए पूरे मतदान में 'खेला होबे'। सूत्र का कहना है कि नंदीग्राम में ममता को घेरने के लिए भाजपा और उसके नेताओं ने पूरी ताकत लगा दी थी। वह मानते हैं कि चुनाव में कांटे का मुकाबला होने के कारण ममता को भी नंदीग्राम में टिक कर प्रचार करना पड़ा। बताते हैं 2016 के विधानसभा चुनाव में भी नंदीग्राम में 86 फीसदी के करीब मतदान हुआ था। शुभेंदु अधिकारी तब 68 हजार वोट से जीते थे। इस बार भी मतदान के 84-85 फीसदी तक जाने की उम्मीद है, लेकिन इस बार शुभेंदु को उनके गढ़ में जोरदार चुनौती मिल गई है।