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West Bengal: 32000 शिक्षकों की नौकरियां रद्द करने के एकल पीठ के आदेश पर रोक, कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला

Sat, 20 May 2023 12:24 AM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Sat, 20 May 2023 12:24 AM IST
सार

जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों के रूप में भर्ती के समय अप्रशिक्षित लगभग 36,000 उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द करने का आदेश दिया।

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West Bengal: Calcutta High Court orders stay on single bench order to cancel jobs of 32000 teachers
Calcutta High Court - फोटो : Social Media

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 32,000 शिक्षकों की नौकरियां रद्द करने के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। यह रोक सितंबर के अंत तक या अगला आदेश दिए जाने तक अंतरिम रहेगी। कोर्ट की एकल पीठ ने 12 मई को उन लगभग 32,000 उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द करने का आदेश दिया था, जिन्होंने 2014 की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आधार पर 2016 में एक चयन प्रक्रिया के माध्यम से प्राथमिक शिक्षकों के रूप में भर्ती होने के बाद प्रशिक्षण पूरा नहीं किया था।

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कब तक रहेगी रोक?
न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने कहा कि नौकरियां रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक रहेगी। यह रोक सितंबर 2023 के अंत तक या अगला आदेश दिए जाने तक, जो भी पहले होगा, जारी रहेगी। इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में लगभग 36,000 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति दे दी थी।
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न्यायिक हस्तक्षेप की प्रथमदृष्ट्या जरूरत: कोर्ट
पीठ ने पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड और कुछ प्रभावित शिक्षकों की याचिका पर अपना अंतरिम आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रभावित पक्षों को अपना बचाव करने के अर्थपूर्ण अधिकार का मौका दिए बिना नौकरियां रद्द करने के फैसले में न्यायिक हस्तक्षेप की प्रथमदृष्ट्या आवश्यकता है। जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की पीठ ने नियुक्तियां रद्द करने का आदेश दिया था।
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जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने क्या कहा था?
जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों के रूप में भर्ती के समय अप्रशिक्षित लगभग 36,000 उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द करने का आदेश दिया, क्योंकि नियुक्ति प्रक्रिया में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। आदेश पारित करते हुए, जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि इस स्तर का भ्रष्टाचार पश्चिम बंगाल में कभी नहीं देखा गया। 

एकल पीठ ने कही थी यह बात
हालांकि, एकल पीठ ने निर्देश दिया कि जिन शिक्षकों को 2016 की चयन प्रक्रिया के संबंध में बोर्ड की सिफारिश के बाद रोजगार मिला है, उन्हें प्राथमिक विद्यालय के पारा शिक्षक के बराबर पारिश्रमिक पर 12 मई से चार महीने तक काम करने की अनुमति दी जाएगी। कोर्ट ने बोर्ड को यह भी निर्देश दिया था कि 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने वाले उम्मीदवारों के लिए ही तीन महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया की व्यवस्था की जाए। इस दौरान प्रशिक्षण योग्यता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को भी अभ्यास में शामिल किया जाएगा।

याचिकाकर्ता ने जताई खुशी
कलकत्ता हाईकोर्ट के 36,000 प्राथमिक शिक्षक की नौकरी रद्द करने के आदेश पर वकील और याचिकाकर्ता तृणज्योति तिवारी ने कहा कि एकल पीठ के आदेश में दो भाग थे; पहला भाग 32,000 नौकरियों को रद्द करना था और दूसरा भाग यह था कि हर कार्यवाही की वीडियोग्राफी की जाए। हम आदेश से खुश हैं क्योंकि अब वास्तविक मेधावी छात्रों को कार्यवाही में भाग लेने का मौका मिलेगा।


आगे उन्होंने कहा कि कार्यवाहियों में पारदर्शिता आएगी। जिन लोगों का पक्ष लिया गया, वे बाहर हो जाएंगे। यह आदेश उन सभी लोगों के साथ न्याय करेगा, जिन्हें बोर्ड और उक्त सरकार द्वारा धोखा दिया गया था। यह एक बहुत अच्छा आदेश है।

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